Kumari Selja's statement in Karnal: Congress will unite and win the municipal elections

Haryana में गहराया पेयजल संकट: कुमारी सैलजा ने सरकार को बताया जिम्मेदार

हरियाणा

Haryana में गर्मी के साथ-साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने इस स्थिति के लिए प्रदेश सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि समय रहते नहरों की सफाई और मरम्मत करवाई जाती, तो टेल (अंतिम छोर) तक पानी पहुंच सकता था।

कुमारी सैलजा ने दावा किया कि सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, झज्जर, सोनीपत, महेंद्रगढ़, नारनौल, जींद, भिवानी जैसे कई जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है। ग्रामीण इलाकों में लोगों को 500 से 800 रुपए में एक टैंकर पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

टेल तक नहीं पहुंचेगा पानी, पहले ही बंद हो जाएंगी नहरें

सैलजा ने बताया कि हाल ही में भाखड़ा नांगल डैम से छोड़ा गया पानी सीमित अवधि के लिए है और जिस रफ्तार से नहरों में बहाव हो रहा है, उससे पहले ही नहरों को बंद करना पड़ सकता है, जिससे टेल एरिया तक पानी नहीं पहुंचेगा। उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता करार दिया।

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सांसद ने पहले ही चेताया था सरकार को

कुमारी सैलजा ने बताया कि उन्होंने 27 मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर सिरसा जिले विशेषकर ऐलनाबाद और रानियां क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर चेतावनी दी थी और नहरों की तत्काल सफाई व मरम्मत कराने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने न तो समय पर सफाई करवाई, न ही उचित मरम्मत कराई।

डार्क जोन में जा रहे जिले, गिर रहा जलस्तर

सैलजा ने कहा कि प्रदेश के 14 जिले अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जिनमें अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, हिसार, पानीपत, सोनीपत, सिरसा, झज्जर, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फतेहाबाद और जींद शामिल हैं। इन इलाकों में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है।

टैंकरों पर निर्भरता, सरकार को घेरा

उन्होंने कहा कि जब नहरों और ट्यूबवेलों से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा, तो आम जनता महंगे दामों पर टैंकर से पानी मंगवाने को मजबूर है। कई गांवों में दो से तीन दिन में ही एक बार पानी की सप्लाई दी जा रही है, जो अपर्याप्त है।

पंजाब से मिला कम पानी, केंद्र और राज्य सरकार पर उठाए सवाल

कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि इस बार पंजाब से हरियाणा को नंगल डैम से अपेक्षाकृत कम पानी मिला है, लेकिन राज्य सरकार इस मुद्दे को पंजाब सरकार के समक्ष मजबूती से नहीं रख सकी। उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार को केंद्र के सामने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहिए।

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