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कागजों पर चल रही पार्टियां अब खतरे में: हरियाणा में 15 राजनीतिक दलों को ECI का नोटिस, 10 साल से चुनाव न लड़ने पर कार्रवाई

हरियाणा हरियाणा की बड़ी खबर

➤15 दलों पर कार्रवाई शुरू
➤10 साल से चुनाव नहीं लड़े
➤रजिस्ट्रेशन रद्द होने की चेतावनी

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने हरियाणा में सक्रिय नहीं रहने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने उन दलों को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने पिछले 10 सालों में कोई चुनाव नहीं लड़ा है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1961 के तहत इन दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है।

हरियाणा में ऐसे 15 दलों की सूची सार्वजनिक की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी दलों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके लिए 2 और 3 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में अलग-अलग तिथि और समय निर्धारित किया गया है।

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आयोग ने साफ किया है कि अगर कोई दल समय पर अपना पक्ष नहीं रखता, तो माना जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है। इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

इससे पहले आयोग ने हरियाणा के 21 गैरमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया था। उनमें से 6 दलों ने कागजात जमा करवा दिए, लेकिन 15 अभी भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। अब उन्हें आखिरी मौका दिया गया है।

नोटिस पाने वालों में झज्जर, गुड़गांव, फरीदाबाद, सिरसा, हिसार, करनाल, रेवाड़ी, अंबाला, मेवात, महेंद्रगढ़, यमुनानगर, भिवानी और रोहतक समेत कई जिलों के राजनीतिक दल शामिल हैं। इनमें कुछ नेशनल लेवल की पार्टियां भी हैं।

जिन दलों को नोटिस जारी हुआ है, उनमें अपना राज फ्रंट झज्जर, हरियाणा स्वतन्त्र पार्टी झज्जर, राष्ट्रीय बुजुर्ग शक्ति पार्टी झज्जर, भारत (इंटीग्रेटेड) रक्षक दल गुड़गांव, भारतीय जन हित विकास पार्टी गुड़गांव, गुड़गांव रेजिडेंट पार्टी, हिन्द समदर्शी पार्टी, कर्मा पार्टी, मेरा गांव मेरा देश पार्टी, इसके अलावा नेशनल जनहित कांग्रेस (AB), समरस समाज पार्टी, टोटल विकास पार्टी, जनता उदय पार्टी, बेरोजगार आदमी अधिकार पार्टी, राष्ट्रीय आर्य राज सभा, सेवा दल, लोक परिवर्तन पार्टी (डीसी), हरियाणा जनरक्षक दल, हरियाणा कान्ति दल, राष्ट्रीय कर्मयोग पार्टी और सुशासन पार्टी जैसी पार्टियां शामिल हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि यह कदम उन दलों को हटाने के लिए है जो केवल नाम मात्र के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में कोई सक्रिय भागीदारी नहीं करते। चुनाव आयोग इसे राजनीतिक दलों की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मान रहा है।