हरियाणा की गुरुग्राम विश्वविद्यालय (जीयू) में प्रोफेसर के डेपुटेशन पद की भर्ती में बड़ा झोलमाल सामने आया है। भर्ती में 4 साल बाद तब खुलासा हुआ, जब इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई। बता दें कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय को 8 साल पहले स्थापित किया गया था। मई 2021 में गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने भर्ती के लिए विज्ञापन निकालकर आवेदन मांगे। हालांकि जीयू की ओर से आवेदन के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया।
गौरतलब है कि इस भर्ती के तहत नियुक्ति में यूजीसी के क्राइटेरिया की भी अनदेखी की गई। आवेदनकर्ता से यूजीसी का मानदंड बी भरवाया गया, क्योंकि वह पात्रता मानदंड ए के अनुसार पात्र नहीं था। ए क्राइटेरिया में 10 साल का अनुभव होना जरूरी होता है। साथ ही न्यूनतम 10 शोध पत्र और 400 का एपीआई स्कोर होना आवश्यक होता है। बताया जा रहा है कि आवेदनकर्ता के द्वारा नियुक्ति से पहले जो भी दस्तोवज लगाए गए हैं, उनमें एक भी दस्तावेज ऐसा नहीं है, जो यह दर्शाता हो कि संबंधित विषय में उनका कोई उत्कृष्ट योगदान है।

वर्ष 2013 से पहले जिन संबंधित संस्थानों में आवेदनकर्ता के द्वारा काम किया गया है, उनमें से आधे से ज्यादा बंद हो चुके हैं। उससे आवेदनकर्ता के एक्सपीरियंस पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही प्रमाण पत्रों में अहम बात यह है कि नियुक्ति से 6 साल पहले ही संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाला व्यक्ति प्रोफेसर पद के लिए कैसे योग्य हो सकता है? सीएम विंडो की शिकायत में इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष रूप से कराने की मांग की गई है।
बताया जा रहा है कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने 19 फरवरी 2024 को पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में डेपुटेशन के पद पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के रीजनल सेंटर नोएडा में प्रोड्यूसर के पद से आए हुए व्यक्ति को रेगुलर प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए आवदेन मांगा है। इस पद पर 3 आवदेन आए, जो कि गुरुग्राम यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा इस कैंडिडेट के सपोर्ट में भरवाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय उन्हें डेप्युटेशन प्रोफेसर के पद पर रहते हुए रेगुलर प्रोफेसर के पद पर मर्ज भी कर सकती है, क्योंकि आवेदनकर्ता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में एनओसी के लिए प्रार्थना की है कि मैं गुरुग्राम विश्वविद्यालय मर्ज होना चाहता हूं।
गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में चल रही भर्ती प्रक्रिया पर कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में जिस तीव्र गति से भर्ती प्रकिया चल रही है, उसमें भारी गड़बड़ है। इसमें किसका चयन होना है, उसका नाम पहले से ही तय हो चुका है। भर्ती का काम इतनी तेज गति से चल रहा है कि किसी को भनक न लगे। साथ ही आनन-फानन में साक्षात्कार सहित सारी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिस भर्ती प्रक्रिया में कई महीने लग जाते हैं, उसको एक ही महीने में पूरा किया जा रहा है।
साथ ही अजय सिंह यादव ने चिंता जताई कि आज बेरोजगारी कितनी है, यह सभी को पता है। ऐसे में जो नौकरी के असली हकदार हैं, उनके हिस्से की नौकरियों को भाजपा नेता और यूनिवर्सिटी प्रशासन किसी अन्य को देना चाह रहा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा नहीं होने देगी। यदि भर्ती प्रक्रिया साफ सुथरे तरीके से नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी सड़क पर आकर प्रदर्शन करेगी।
आरोप है कि जिस आवेदनकर्ता के द्वारा अपने प्रमाण पत्रों को संलग्न किया गया है, उनमें वर्किंग रहते ही संबंधित विषय में रेगुलर कोर्स की डिग्री हासिल कर ली। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि एक ही समय में एक व्यक्ति दो जगहों पर कैसे मौजूद रह सकता है? यह अपने आप में सवाल खड़े करता है। बताया जा रहा है कि आनन-फानन में 6 अगस्त 2021 को इंटरव्यू आयोजित कर उनका चयन कर लिया। आरोप है कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय में 11 अगस्त 2021 को प्रोफेसर के पद पर कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही नियुक्त किए गए प्रोफेसर को लॉ और हमनीटीएस का डीन बना दिया। इसके साथ ही कई अहम जिम्मेदारियां भी दे दी गईं। जॉइन करते ही दो नए कोर्स शुरू कराए गए।
शिकायत में यह लिखा है कि यह बात बताने योग्य है कि नियुक्ति हुए प्रोफेसर के कार्यकाल में इन कोर्सेज में 10 फीसदी भी बच्चों ने एडमिशन नहीं लिया। गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने ऐसे प्रोड्यूसर को लाखों रुपए की सैलरी दी, जिसने कभी एक भी लेक्चर नहीं लिया था। इसके अलावा शिकायत में कई सवाल उठ रहे हैं। इनमें नियुक्ति के दौरान रजिस्ट्रार बैठक में मौजूद नहीं रहे। सिलेक्शन कमेटी ने नियुक्ति पर डिप्टी रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर कराए। नियम यह है कि किसी भी नियुक्ति में रजिस्ट्रार के ही सिग्नेचर जरूरी है। वहीं नियुक्ति तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक रजिस्ट्रार द्वारा वेरिफिकेशन नहीं किया जाता।





