गुरुग्राम में डंपिंग प्वाइंट से कूड़ा उठाने और डोर टू डोर कलेक्शन में हो रही समस्या अभी तक दूर नहीं हो पाई है। दो वर्ष तक ही कंपनी को एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जाना था। टेंडर की शर्तों के हिसाब से कंपनी को भुगतान किया जा रहा है।
नगर निगम के बड़े टेंडर भुगतान के विवाद में उलझ गए हैं। शहर में स्ट्रीट लाइटें लगाने वाली एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा बकाया भुगतान नहीं होने से नगर निगम गुरुग्राम के साथ समझौता कर खत्म करने के साथ ही कूड़ा प्रबंधन करने वाली इको ग्रीन का भी भुगतान को लेकर निगम के साथ विवाद चल रहा है।
नगर निगम नहीं कर पा रहा कूड़े की समस्या को दूर
भूगतान ने होने के कारण शहर के कई क्षेत्रों में कूड़ा उठाने को लेकर परेशानी चल रही है। नगर निगम भी डंपिंग प्वाइंट से कूड़ा उठाने और डोर टू डोर कलेक्शन में हो रही समस्या को दूर नहीं कर पाया है। 575 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। संसाधनों में नंबर वन होने के बावजूद शहर स्वच्छता रैंकिंग में नंबर वन नहीं हो सका है।
शहर में है दस हजार नई स्ट्रीट लाइटें लगाने की जरुरत
ईईएसएल कंपनी के पास शहर में लगाई गई लगभग 82 हजार लाइटों का रखरखाव का कार्य था। इसके साथ ही शहर में दस हजार नई स्ट्रीट लाइटें भी लगाने की जरूरत है। लेकिन ईईएसएल द्वारा नगर निगम से समझौता खत्म करने के बाद अब लाइटों का रखरखाव कार्य बंद होने से परेशानी बढ़ सकती है। नगर निगम में रोजाना खराब स्ट्रीट लाइटों से संबंधित 40 से 50 शिकायतें पहुंचती हैं। शहर में लगभग 30 लाख आबादी है और टेंडरों के विवाद में शहरवासी सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं।
रेट को लेकर है विवाद
कूड़ा प्रबंधन करने वाली कंपनी इको ग्रीन और नगर निगम गुरुग्राम के बीच कूड़ा उठान को लेकर विवाद चल रहा है। एजेंसी के प्रतिनिधियों का कहना है कि कूड़ा उठान की एवज में एक हजार रुपये टन की बजाय 333 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि दो वर्ष तक ही कंपनी को एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जाना था। टेंडर की शर्तों के हिसाब से कंपनी को भुगतान किया जा रहा है।

