हरियाणा बसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पानीपत राजपूत सभा के अध्यक्ष Narendra Rana का शनिवार को निधन हो गया। वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे और चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। चुनाव प्रचार के दौरान भी वे अपने बेटे गोपाल राणा, जो बसपा-इनेलो के संयुक्त प्रत्याशी थे, के समर्थन में वोट की अपील करते नजर आए थे। उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन चुनाव के बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां शनिवार को उनका निधन हो गया।
अंतिम संस्कार और शोक संदेश
उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 9 बजे उनके पैतृक गांव ददलाना में किया जाएगा। नरेंद्र राणा के निधन पर राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके करीबी कांग्रेस नेता नैनपाल राणा ने कहा, “नरेंद्र राणा की मृत्यु से मैं बहुत आहत हूं। वह मेहनती थे और समाजसेवा में हमेशा आगे रहते थे।”
समाजसेवा और राजनीतिक योगदान
नरेंद्र राणा 2005 में गांव ददलाना के सरपंच बने थे और उनके नेतृत्व में गांव में कई विकास कार्य हुए। उन्होंने स्टेडियम, सीएचसी, पशु अस्पताल, पावर हाउस, सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सड़कों का निर्माण करवाया। 2009 में वे कांग्रेस में सक्रिय रहे, और इसके बाद 2019 में बसपा में शामिल होकर असंध से चुनाव लड़ा। हालांकि, वे 1703 वोटों से हार गए थे। उन्होंने रिफाइनरी में ठेकेदार के रूप में हजारों युवाओं को रोजगार दिलवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
परिवार और समाज में योगदान
नरेंद्र राणा अपने पांच भाइयों में सबसे बड़े थे और उनके दो बेटे, एडवोकेट गोपाल और इंजीनियर नीरज, और एक बेटी है। सभी बच्चे शादीशुदा हैं। नरेंद्र राणा सभी 36 बिरादरियों को साथ लेकर चले और समाज में भाई और बेटे के रूप में काम किया।
गोपाल राणा की भावुक पोस्ट
नरेंद्र राणा के बेटे, गोपाल राणा, ने 8 अक्टूबर को चुनाव हारने के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट डाली थी। उन्होंने इसमें सिस्टम को दोषी ठहराते हुए कहा कि “आज चुनाव गोपाल राणा नहीं, बल्कि एक बेटा हारा है।” उन्होंने अपने पिता के सपने को पूरा करने की लड़ाई लड़ने की बात कही और उनके बीमार होने का ज़िक्र किया।







