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जाति और क्षमता के फार्मूले पर चलेगी हरियाणा कांग्रेस: 30 जुलाई तक जिला स्तर के संगठन होंगे फाइनल

हरियाणा

➤कांग्रेस 30 जुलाई तक हरियाणा में संगठनात्मक ढांचा तैयार कर लेगी; जिलाध्यक्षों के नाम अंतिम चरण में।

➤नाम चयन में जातीय समीकरण, क्षमता और पार्टी के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता दी गई।

➤शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी के बाद सूची जारी होगी; नेताओं को विरोध से किया गया मना।

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हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक ढांचा आगामी 30 जुलाई से पहले तैयार कर लिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक जिले से तीन-तीन नामों के पैनल पर मंथन के बाद एक-एक नाम को अंतिम रूप दे दिया गया है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में सोमवार को आयोजित एक बैठक में इस पर फैसला लिया गया। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से वन-टू-वन चर्चा कर नामों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की।

पार्टी की रणनीति के मुताबिक जिलाध्यक्षों के चयन में जातिगत संतुलन (कास्ट), क्षमता (कैपेबिलिटी) और निष्ठा (डेडिकेशन) जैसे तीन मानकों को मुख्य आधार बनाया गया है। इन नामों की अंतिम मंजूरी अब राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल की चर्चा के बाद दी जाएगी, जिसके बाद 30 जुलाई से पहले सूची जारी कर दी जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि इस सूची में किसी भी विधायक को शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा उन नेताओं को भी सूची से बाहर रखा गया है, जिन्होंने बार-बार पार्टी बदली हो या फिर विवादास्पद बयानबाज़ी से पार्टी को असहज किया हो।

कांग्रेस ने अपनाया तीन स्तरीय चयन फार्मूला

  1. जातिगत समीकरण (Caste): जिलाध्यक्ष तय करते समय संबंधित जिले के जातिगत समीकरणों को सबसे ऊपर रखा गया। जैसे – हिसार में वैश्य और पंजाबी समाज के वोटरों की बहुलता को देखते हुए इन्हीं में से किसी को अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जाट और ओबीसी समाज पर फोकस किया गया है।
  2. क्षमता (Capability): पार्टी चाहती है कि जिलाध्यक्ष ऐसा हो जो न केवल सांगठनिक रूप से सक्षम हो, बल्कि जिले में जनाधार भी रखता हो। ऐसे अनुभवी और प्रभावी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है जो खुद अपने बूते पार्टी को मज़बूत कर सकें।
  3. निष्ठा (Dedication): जिन नेताओं की पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठा रही है और जिन पर किसी तरह का दाग नहीं है, उन्हीं को प्राथमिकता दी गई है। यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जिलाध्यक्ष न बने, जो अवसर मिलने पर विपक्षी दलों का रुख कर ले।

वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी: विरोध बर्दाश्त नहीं होगा

दिल्ली बैठक में कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेशाध्यक्ष उदयभान, सांसद कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला, पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह और कैप्टन अजय सिंह यादव मुख्य रूप से मौजूद थे।
इन सभी नेताओं से राय लेने के साथ ही उन्हें स्पष्ट हिदायत दी गई कि सूची जारी होने के बाद कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं करेगा और मीडिया में बयानबाज़ी नहीं होगी। सभी को शीर्ष नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करना होगा।

संगठन सृजन की शुरुआत राहुल गांधी के दौरे से

हरियाणा में संगठन सृजन की प्रक्रिया की शुरुआत 4 जून को राहुल गांधी के प्रदेश दौरे से हुई थी। राहुल गांधी ने चंडीगढ़ में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाकर AICC और PCC द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों से मुलाकात की थी और उन्हें संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

इसके बाद पर्यवेक्षकों ने राज्य के सभी 22 जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लिया। जिलाध्यक्ष पद के लिए आवेदन करने वालों में से 6-6 नामों के पैनल बनाकर प्रदेश प्रभारी को भेजे गए। इन पैनलों की गहन समीक्षा राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और बीके हरिप्रसाद द्वारा की गई, जिसके बाद एक-एक नाम को फाइनल किया गया।

अब यह सूची कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष भेजी जाएगी, जहां अंतिम सहमति मिलने के बाद हरियाणा कांग्रेस को नए जिलाध्यक्षों के रूप में नया संगठनात्मक चेहरा मिल जाएगा।