हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के बीच विवाद अभी भी हल नहीं हो पाया है। इस विवाद के चलते अनिल विज शीतकालीन सत्र से किनारा कर सकते हैं। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक सीएम मनोहर लाल के साथ हुई दो दौर की वार्ता में भी कोई समाधान नहीं निकला है, जिसके कारण विज बहुत नाराज हैं।
उनका ध्यान गृह विभाग के अलावा किसी अन्य काम पर नहीं है। विधानसभा में सरकार और विपक्षी दलों के सांसदों ने स्वास्थ्य से जुड़े 24 से अधिक सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने बताया है कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया है कि कांग्रेस ने इस मामले के लिए विशेष रणनीति बनाई है, जिसके तहत सरकार को इस मुद्दे पर दबाव डाला जाएगा। हेल्थ विभाग में बने गतिरोध को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री और अनिल विज के बीच दो मीटिंगें हो चुकी हैं। पहली मीटिंग 15 नवंबर को हुई थी, जिसमें विज ने मामले की पूरी जानकारी सांझा की थी। फिर भी विवाद का कोई समाधान नहीं निकला। उसके बाद अनिल विज ने हेल्थ मंत्रालय का छोड़ने की धमकी दी थी। फिर सीएम और विज के बीच 7 दिसंबर को मीटिंग हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
विज की नाराजगी की मुख्य वजह थी 5 अक्टूबर को सीएमओ द्वारा स्वास्थ्य विभाग की रिव्यू मीटिंग। मीटिंग में सीएम के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी की पत्नी भी शामिल थीं, जो कि स्वास्थ्य महानिदेशक हैं। विज इस मीटिंग में नहीं थे। विज के इस नाराजगी के कारण, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की फाइलों पर साइन करना बंद कर दिया। बताया जाता है कि इन 2 महीनों में सिर्फ 2 फाइलें ही निकलीं हैं, जिन पर उनकी साइन नहीं हुई थी। विधानसभा में विपक्ष इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है, जिससे सरकार के लिए नया दबाव बढ़ेगा।

