स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच चल रहे विवाद ने 34 दिनों से चल रहे हैं। विवाद की मुख्य वजह है एक स्वास्थ्य विभाग की रिव्यू मीटिंग, जिसमें मंत्री विज नहीं शामिल हुए थे। उन्होंने इसके बाद से स्वास्थ्य महकमे की फाइलों पर काम रोक दिया है, जिससे हेल्थ के कई प्रोजेक्ट लटक गए हैं।
इस विवाद ने हाल ही में होने वाली 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आयुर्वेदिक रीजनल रिव्यू मीटिंग में भी असर डाल दिया है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में भी अनिल विज के शामिल होने पर संशय बना हुआ है। इस मीटिंग में हरियाणा के साथ ही हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, और दिल्ली के 8 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय आयुष मंत्री, कई राज्यों के मंत्री, और सीनियर ऑफिसर भाग लेने जा रहे हैं।
सरकारी कामों में विवाद का असर
विवाद की मुख्य वजह वही रही है, जो एक स्वास्थ्य विभाग की रिव्यू मीटिंग की थी। इस मीटिंग में स्वास्थ्य महानिदेशक और अन्य विभागाध्यक्षों की मौजूदगी थी, लेकिन मंत्री अनिल विज वहां नहीं थे। मामले में विवाद ने राजनैतिक स्तर तक जा पहुंचा है। सूत्रों के मुताबिक, विवाद ने नेताओं और पार्टियों को भी साथ लिया है। सरकारी काम में इस विवाद का असर हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और परियोजनाओं में देरी हो रही है।
तनातनी का मामला दिल्ली तक भी पहुंच चुका
2019 के विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद भाजपा ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के साथ मिलकर राज्य में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। 28 अक्टूबर 2019 को मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री और दुष्यंत चौटाला ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। इसके 17 दिन बाद 14 नवंबर 2019 को अनिल विज समेत 6 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली। जब पोर्टफोलियो बांटे गए तो विज को गृह मंत्रालय दिया गया, लेकिन इसी मंत्रालय के तहत आने वाले सीआईडी की रिपोर्टिंग सीएम ने अपने पास रखी। जिस पर खूब खींचतान हुई। जिसका मामला इन दिनों दिल्ली तक पहुंचा हुआ है और मामले को लेकर करनाल में 3 दिन पहले आयोजित हुए कार्यक्रम में अमित शाह भी पहुंचे थे, जिन्होंने दोनों से वार्तालाप करने का भी प्रयास किया, जिसकी चर्चा है।