गुरुग्राम कैनल में आज एक युवक ने पुल के ऊपर अपनी होंडा शाइन बाइक को खड़ा कर सेक्टर 17 पुल के ऊपर से नहर में छलांग लगा दी। बता दे कि मृतक की पहचान विनीत बघेरिय उम्र 31 वर्ष पुत्र नरेश बघेरिया सेक्टर 16 मकान नंबर 441 के रूप में हुई है। जिसके शव को पुलिस ने नहर से रेस्क्यू करके कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है।
मृतक विनीत बघेरिया के पिता नरेश बघेरिया के मुताबिक उनका अपना शेयर मार्केट का काम है, उनका बेटा विनीत बघेरिया कंप्यूटर इंजीनियर था। जिसने मानव रचना यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियर की पढ़ाई की थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से वह मानसिक तौर पर परेशान चल रहा था। जिसका इलाज वह दिल्ली के एक नामी डॉक्टर से करा रहे थे, लेकिन उसकी मानसिक परेशानी पूरी तरह से कम नहीं हुई थी। इसी परेशानी के चलते विनीत दो बार पहले भी जान देने की कोशिश कर चुका था।
बेटे की परेशानी को लेकर चिंतित थे पिता
हाल ही में विनीत ने भारी मात्रा में दवाइयों का सेवन कर लिया था। जिसके चलते उसे फरीदाबाद के मेट्रो अस्पताल में आईसीयू भर्ती कराया गया था, कुछ दिन चले इलाज के बाद विनीत ठीक होकर घर आया था। विनीत के पिता नरेश बघेरिया ने बताया कि वह भी अपने बेटे की परेशानी को लेकर काफी चिंतित थे और उसके कहीं आने जाने पर निगाह रखते थे, लेकिन आज उनका बेटा विनीत घर से बाइक लेकर बिना किसी को कुछ बताएं बिना ही घर से निकल गया और जब वह लगभग 1 घंटे तक वापस नहीं आया तो उन्हें इसकी जानकारी हुई।
जिसके बाद उन्होंने अपने जानकारों की मदद से विनीत को या उधर तलाशने का काम शुरू किया। कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि सेक्टर 17 से गुजर रही गुरुग्राम कैनाल के पुल पर विनीत की बाइक खड़ी है और उसे नहर में छलांग लगाते हुए भी देखा गया है। जिसके बाद वह जब सैक्टर 17 गुरुग्राम कैनाल के पुल पर पहुंचे तो पता चला कि विनीत के शव को सेक्टर 14 के पास नहर से बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए फरीदाबाद बादशाह खान अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है।
बुढापे की लाठी छीन ली गई
वहीं मृतक विनीत के पिता नरेश बघेरिया ने बताया कि उनके दो बेटी और बेटा था, जिनमें से अब उनके पास दो बेटियां बची है। जिनमें एक गोरखपुर में डॉक्टर की पढ़ाई कर रही है, तो दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने अपने बेटे को इंजीनियर बनाया था, ताकि वह बुढ़ापे की लाठी बन सके, लेकिन अब उनके बुढ़ापे की लाठी छीन गई। वह सोच रहे हैं कि उन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं किया, बावजूद भगवान ने उनके साथ ऐसा क्यों किया।