हरियाणा सरकार ने एक नया मंदिर विधेयक तैयार किया है, जो मध्य प्रदेश के तर्ज पर बनाया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य हरियाणा के विभिन्न गांवों में स्थित मंदिरों के रखरखाव को सुनिश्चित करना है। इसे गृह विभाग ने तैयार किया था, लेकिन विधेयक के प्रारूप को समझने के बाद गृह मंत्री अनिल विज ने इसे राजस्व विभाग को भेज दिया है।
विज ने बताया कि हरियाणा के विधेयक को राजस्व विभाग के अधीन आना चाहिए। अब विधेयक को राजस्व विभाग से आगे बढ़ाने का काम होगा। विधेयक को विधानसभा में पेश करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन यदि विधेयक का प्रारूप अगले 2 दिनों में तैयार नहीं होता, तो इसे बजट सत्र में पेश किया जा सकता है।
राज्यभर के मंदिरों के रखरखाव की योजना की है तैयार
इस नए विधेयक में हरियाणा सरकार ने राज्यभर के मंदिरों के रखरखाव के लिए एक योजना तैयार की है। जिन गांवों में हिंदू आबादी 20 फीसदी से कम है, वहां के मंदिरों की जिम्मेदारी सरकार लेगी। इसके लिए जिले में एक बोर्ड बनाया जाएगा, जिसके मुखिया डीसी होंगे। यह निर्णय राज्य में हिंदू आबादी कम होने या फिर वहां से पलायन कर चुके होने पर प्रभावी होगा।
पहले मंदिरों की मरम्मत फिर पूजा का इंतजाम
विधेयक के अनुसार, इस नए प्रणाली के तहत मंदिरों की देखरेख के लिए बोर्ड बनाया जाएगा, जिसके मुखिया डीसी होंगे। बोर्ड में कुछ स्थानीय लोगों को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद सरकार पहले मंदिरों की मरम्मत करेगी और फिर पूजा का इंतजाम करेगी। विधेयक में यह भी दिया गया है कि राज्य में पहले से मौजूद ट्रस्ट खत्म हो जाएंगे।
नए विधायक में ट्रस्ट की स्थिति होगी खत्म
विधेयक में यह भी कहा गया है कि नए अधिनियम के अनुसार, मंदिर संचालन समिति का गठन होगा, जिसमें डीसी के अलावा पुलिस अधीक्षक, नगरीय निकाय का आयुक्त, नगर पालिका अधिकारी, जिले के चार अधिकारी, दो पुजारी, दो अशासकीय धर्म-पूजा विधान के जानकार, दो अशासकीय सदस्य और विशेष आमंत्रित शामिल होंगे। नए विधेयक में ट्रस्ट की स्थिति खत्म हो जाएगी और समिति को अधिकार और वित्तीय अधिकारों में वृद्धि मिलेगी।

