➤हरियाणा सरकार जेल डाइट चार्ट में बदलाव करने जा रही
➤प्रति कैदी रोजाना 12 रुपए अतिरिक्त खर्च, सालाना 11 करोड़ का बोझ
➤ब्रेकफास्ट में नए विकल्प, लंच-डिनर में दाल-चावल-दही भी शामिल
हरियाणा सरकार ने राज्य की जेलों में कैदियों के डाइट चार्ट में बदलाव करने की तैयारी कर ली है। जेल विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा है। नए चार्ट के अनुसार कैदियों को अब ब्रेकफास्ट में ब्रेड, रस्क और फैन जैसे विकल्प मिल सकेंगे, जबकि लंच और डिनर में मौसमी सब्जी, दाल, चावल और दही को शामिल किया गया है।
इस बदलाव से सरकार पर सालाना लगभग 11 करोड़ 52 लाख रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। अभी एक कैदी पर प्रतिदिन खाने और नाश्ते की लागत 62.83 रुपए आती है, जो बढ़कर 75.10 रुपए तक पहुंच जाएगी। यानी प्रति कैदी रोजाना करीब 12.27 रुपए का अतिरिक्त खर्च होगा।
गौरतलब है कि कैदियों पर खर्च के मामले में हरियाणा पहले से ही देश में दूसरे नंबर पर है। प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया रिपोर्ट-2023 के मुताबिक आंध्र प्रदेश एक कैदी पर सालाना 2.68 लाख रुपए खर्च करता है, जबकि हरियाणा में यह खर्च 1.60 लाख रुपए और दिल्ली में 1.49 लाख रुपए है। वहीं, मिजोरम में यह खर्च केवल 2,000 रुपए प्रति कैदी है।
हरियाणा की 17 जिला जेलों में कुल क्षमता 22,647 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में 26,000 से अधिक कैदी बंद हैं। यानी यहां 121 फीसदी कैदी क्षमता से अधिक ठहरे हुए हैं। देशभर में सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की बताई गई है, जहां क्षमता से दोगुने तक कैदी बंद हैं, जबकि लद्दाख सबसे बेहतर स्थिति में है।
जेलों में डाइट बदलाव के अलावा कैदियों के लिए कई वेलफेयर योजनाएं भी चल रही हैं। करनाल में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जेल अकादमी खोली गई है, जहां 117 नए वार्डन और सहायक अधीक्षक को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा जेलों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन भी खोले गए हैं। केवल कुरुक्षेत्र जेल के पेट्रोल पंप ने पिछले वर्ष लगभग 54 करोड़ रुपए की बिक्री की थी। अब भिवानी, सिरसा, जींद, फरीदाबाद, नूंह और नारनौल में भी नए पेट्रोल पंप लगाने की मंजूरी दी गई है।
जेलों में पहले से ही कैंटीन सुविधा मौजूद है, जहां कैदी अपने पैसों से ब्रांडेड जूते, चप्पल, कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट, नमकीन और अन्य सामान खरीद सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा की जेलों में कैदी और हवालाती हर साल 12 से 15 करोड़ रुपए तक कैंटीन पर खर्च करते हैं।
इस तरह हरियाणा की जेलें न केवल डाइट और सुविधाओं को लेकर बल्कि खर्च के मामले में भी देशभर में अलग पहचान बना चुकी हैं।

