एचसीएस एवं डेंटल सर्जन भर्ती घोटाला : ईडी ने विशेष कोर्ट में जवाब किया दाखिल, 6 दिन टली सुनवाई

पंचकुला हरियाणा

प्रदेश में एचसीएस एवं डेंटल सर्जन भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई होने का मामला सामने आया है। जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पंचकूला की विशेष कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया जा चुका है। वहीं कोर्ट में मुख्य आरोपी अनिल नागर द्वारा भी अपना पक्ष रखा गया है। मामले में कोर्ट की ओर से अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की डेट तय की गई है।

अनिल नागर की ओर से एडवोकेट विशाल गर्ग नरवाना द्वारा कोर्ट में जमानत को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। विशाल का कहना है कि अनिल नागर की जमानत को लेकर कोर्ट में पहले से ही एप्लिकेशन फाइल की जा चुकी है। ईडी द्वारा भी मामले में अपना जवाब दाखिल किया जा चुका है। अब इसी माह होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से दलीलें रखी जाएगी।

जांच में 6-7 बार शामिल हो चुके नागर

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एडवोकेट विशाल गर्ग ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अनिल नागर मामले में चल रही जांच में 6 से 7 बार शामिल हो चुके हैं, अभी तक की जांच में पूरा सहयोग भी दिया है। मामले से जुड़े तथ्य भी बताए जा चुके है। ईडी का कहना है कि अभी उन्हें अनिल नागर से पूछताछ करनी है, लेकिन पुलिस पहले ही पूछताछ कर चुकी है, जिसके बाद पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान भी पेश किया जा चुका है।

क्या है मामला

स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने हिसार के उकलाना निवासी नरेंद्र की शिकायत पर 17 नवंबर 2021 को भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर में 29 सितंबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा डेंटल सर्जन की भर्ती के लिए रिटेन परीक्षा में सेटिंग के आरोप लगाए गए। मामले में भिवानी के नवीन और झज्जर के अश्विनी शर्मा के तार भी एचसीएस अनिल नागर के साथ जुड़े पाए गए।

फेल होने का डर दिखा पैसे ऐंठने की रची जाती थी साजिश

डेंटल सर्जन की भर्ती में मोटी रकम लेकर नंबर बढ़वाने वाला गिरोह ग्रुप-डी से लेकर क्लास-वन तक की नौकरियों में डील करता था। एचपीएससी के अलावा एचएसएससी में जबरदस्त सेटिंग थी। परीक्षा से पहले मनचाहा परीक्षा केंद्र दिलाने, आस-पास रोल नंबर सेट करने से लेकर परीक्षा के बाद नंबर बढ़ाने की गारंटी ली जाती थी। अपने दम पर मेरिट में आने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क साध उनको फेल होने का डर दिखा पैसे ऐंठने की साजिश रची जाती थी। यह खुलासा अनिल नागर और उसके सहयोगी अश्वनी और नवीन से पूछताछ में किया जा चुका है।