Jind के उचाना में डेंगू का असर तेज हो गया है। अब तक 6 कंफर्म केस सामने आ चुके हैं। प्रदूषण के बढ़ते स्तर (AQI) 350 तक पहुंचने से नागरिकों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर सुशील गर्ग ने बताया कि प्रदूषण और मौसम की वजह से बुखार के मरीजों में वृद्धि देखी गई है।

गर्ग ने कहा कि जो केस आता है उसका ट्रीटमेंट शुरू कर देते हैं। अभी तक कोई सीरियस केस हमारे संस्था में नहीं आया हमारे एरिया में कोई भी डेंगू से मौत नहीं हुई। डेंगू बुखार से बचने के लिए हमने फील्ड टीम बनाई है जो नुक्कड़ सभा करके लोगों को अवेयर करती है।

यह टीम लोगों को बताती है कि किस तरीके से डेंगू से डेंगू से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर PHC लेवल पर हमने टीम में बना रखी है, जिसमें वर्कर्स और सुपरवाइजर की टीमें है। ये टीमें गांव में जाकर लोगों को प्रेरित करते हैं कि कही भी खुला पानी ना छोड़े, इससे मच्छर पनपते हैं, डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं और प्रदूषण का लोगों पर बहुत इफेक्ट आ रहा है क्योंकि प्रदूषण की वजह से अचानक खांसी और दमा के मरीजों में वृद्धि हुई है।

हम एडवाइज देते हैं कि मास्क का प्रयोग करें ताकि प्रदूषण से बचा जाए जो अस्थमा रोगी है उनके लिए स्पेशल प्रदूषण से बचने की आवश्यकता है। सुबह शाम को बाहर न निकले बाहर जाएं तो मास्क का प्रयोग करें

इस मौसम में सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत है जो डस्ट पार्टिकल है। इस टाइम पर वो बढ़ जाते हैं। दमा के मरीजों के लिए यह मौसम ज्यादा हानिकारक है। इस टाइम में वायरल फीवर भी होता है। खांसी जुकाम और डेंगू के पेशेंट बहुत है। इस समय दमा के पेशेंट ज्यादा बढ़ गए। सरकार ने छोटे बच्चों की तो छुट्टी कर दी है डॉक्टर ने कहा कि जब भी कहीं जाए तो मास्क का प्रयोग करें। घरों में पानी इकट्ठा ना होने दे, ताकि डेंगू जैसे मच्छर ना हो और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।








