Karnal : अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष एमएस बिट्टा(MS Bitta) करनाल पहुंचे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ राजनीतिक पार्टियों को एक मंच पर आने का आह्वान किया। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ रची गई साजिश पर भी सवाल उठाए। बिट्टा ने कहा कि गैंगस्टर, आतंकवादी या फिर खालिस्तानी हो, सभी राजनीतिक पार्टियों को एक मंच पर एकत्रित होने की जरूरत है।
किसान आंदोलन के दौरान शंभू बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन चलता रहा। किसान पूरे देश में हैं, अकेले पंजाब में नहीं। इसके अलावा किसी और प्रदेश के किसानों ने धरना नहीं लगाया। धरना देने का सबको अधिकार है, लेकिन आंदोलन के अंदर देश के प्रधान सेवक पीएम नरेंद्र मोदी के बारे में यह कहा जाए कि पहले फिरोजपुर में आए थे, अब बचकर नहीं जाएंगे, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह मेरा सवाल है? बिट्टा ने कहा कि हमने दो-दो प्रधानमंत्रियों को खोया है। हमने राजीव गांधी को खोया है, हमने इंदिरा गांधी को खोया है, हमने पंजाब के चीफ मिनिस्टर को खोया है, हमने पंजाब में 36 हजार बेकसूरों का कत्लेआम होते देखा है और 19 हजार हिंदू भाइयों का खून पीते हुए देखा है, अब भी चंद लोग खून के प्यासे हैं, तो सिख समाज से आवाज उठे। पता नहीं इन लोगों को किस बात का गुरूर है। मैं पहले भारतीय हूं, उसके बाद सरदार हूं।

तिरंगे के अपमान पर क्या सरदार भाइयों को तकलीफ नहीं होती? बिट्टा ने कहा कि तिरंगा झंडा सिर्फ हिंदू का नहीं, बल्कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई का है। जलियांवाला बाग के अंदर अंग्रेजों ने जो खून बहाया, उस रक्त से यह तिरंगा झंडा बना है। मेरा सवाल है मेरे सरदार भाइयों से, जब जर्मनी, यूके, कनाड़ा, जैसे देशों में तिरंगे का अपमान होता है तो क्या सरदार भाइयों आपको तकलीफ नहीं होती। जिसने भी गलत बोलना है मेरे बारे में बोले, मेरे लिए राष्ट्र सबसे पहले है।

खालिस्तान न तो कभी बना था और न ही बनेगा
बिट्टा ने खालिस्तानी समर्थकों को दो टूक जवाब दिया। कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में लाल किले में झंडा लहराकर पाकिस्तान को क्या बताना चाहते थे कि हमने झंडा लगाकर भारत पर कब्जा कर लिया। न तो कभी खालिस्तान बना था और न ही बनेगा। बिट्टा ने सिख कौम से सवाल किया कि चंद लोगों की वजह से सिख कौम पर दाग लगा दिया गया, लेकिन सिख समाज से आज तक आवाज क्यों नहीं उठी।

क्या भारत सरदार भाइयों का नहीं है?
सिख कौम ने की असहाय लोगों की रक्षा बिट्टा ने कहा कि सिख कौम असहाय लोगों की रक्षा के लिए रही है। हिंदू के साथ मिलकर सिख कौम ने लड़ाई लड़ी है। किसान आंदोलन कर रहे हैं तो करें, लेकिन आंदोलन के बीच में घुसकर पगड़ी पर दाग लगाने का काम किया जा रहा है। क्या सिख कौम इकट्ठा होकर इतना भी नहीं कर सकती कि पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलने वाले पन्नू के साथ हमारा कोई नाता नहीं, हम खालिस्तान नहीं चाहते। देश हमारा है और हम इसके हैं। इतना किस बात का अहंकार है। हमारे गुरुओं ने झुकना सिखाया है।







