Mohammad Bhai Kachhi came from Gujarat for the 37th time to Surajkund fair

Faridabad : सूरजकुंड मेले में गुजरात से 37वीं बार आए मोहम्मद भाई कच्छी, 150 साल पुरानी है हैंडलूम कला

फरीदाबाद बड़ी ख़बर हरियाणा

हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में गुजरात के भुज-कच्छ के संजोग नगर से आए मोहम्मद भाई कच्छी हैंडलूम शॉल कला को लेकर यहां पहुंचे हैं। सूरजकुंड मेले में थीम राज्य गुजरात की अद्भुत छवि देखने को मिल रही है। 1987 में जब पहला सूरजकुण्ड मेला लगा था। मोहम्मद भाई कच्छी यहां तब भी आये थे। सूरजकुंड मेले में ये लगातार 37 बार आ चुके हैं। मोहम्मद भाई बताते हैं कि इनकी हैंडलूम कला 150 वर्ष से अधिक पुरानी है और उनकी आठवीं बुनकर का काम कर रही है। पहले गुजरात के राजा-महाराजा ही इस कच्छी हैंडलूम से संबंधित विविध परिधानों को पहनते थे। समय बदलने के साथ अब इसे समाज का प्रत्येक व्यक्ति पहनता है। इसके साथ ही बॉलीवुड की पहचान अमिताभ बच्चन की धर्म पत्नी जया बच्चन उनकी रेगुलर कस्टमर है।

वे बताते हैं कि उनको अपनी कला की वजह से विदेशों में भी पहचान मिली है। गुजरात एक पर्यटन राज्य होने के चलते विदेशी पर्यटक भी इनके पास आते हैं और कच्छी हैंडलूम के शॉल, साड़ियां, सूट सहित विभिन्न तरह के परिधान अपने साथ लेकर जाते हैं। उनका कहना है कि उनकी बनाई स्टाल बहुत ही बेहतरीन होती है। अब तकनीकी युग होने के चलते टैक्सटाइल कंपनियां आने से अब धागा वहीं से लिया जाता है। स्टाल और साड़ियों की बुनाई पूरी तरह से हाथ से होती है। उन्होंने बताया कि उनके पास 650 से लेकर 6 हजार रुपए की स्टाल उपलब्ध है। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने 400 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया हुआ है। जैसे शॉल के दाम बढ़ेंते है तो उसे तैयार करने में भी उतना ही समय लगता है। मोहम्मद भाई ने बताया कि 60 हजार रुपए वाली शॉल को तैयार करने में तीन महीने का समय लगता है।