हरियाणा में करनाल की आरआर राइस मिल पंजाब नेशनल बैंक से डिफॉल्टर है। इसके साथ ही इसके संचालक मुरली ने वेयर हाउस का सरकारी चावल भी वापस नहीं किया इै। इसके बाद भी अब उसके दूसरे मिल रामा राइस मिल को हैफेड ने सरकारी धान का कोटा अलॉट कर दिया है। मामला खुला तो जिम्मेदारों ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए खुद का बचाव कर लिया।
हैफेड के डीएम उद्धम सिंह कंबोज ने कहा कि उन्हें नहीं पता मुरली कहां से डिफॉल्टर है। यदि शिकायत मिली तो कार्रवाई कर देंगे। उधर, जिला खाद्य आपूर्ति के डीएफएससी अनिल कलाड़ा ने बताया कि ऐसा होना नहीं चाहिए। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच की जाएगी। जिम्मेदारी तय होगी।
धान खरीद में हर साल हो रहा भ्रष्टाचार
यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष राकेश ढुल ने बताया कि हर साल सरकारी धान खरीद में भारी भ्रष्टाचार होता है। इसे रोकने के लिए मनोहर लाल सरकार लगातार काम कर रही है। इसके बाद भी कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से घोटाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। धान की फर्जी खरीद हो या फिर सरकारी धान लेकर वापस न करने का मामला हो, इससे किसान, गरीब लोग व सरकार को भारी नुकसान होता है। इसके बाद भी इस नुकसान को रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम जिम्मेदार नहीं उठा रहे हैं।
लिस्ट होती है पहले ही तैयार
एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि सरकारी धान जिन राइस मिलर्स को अलॉट किया जाता है, उनकी लिस्ट पहले तैयार होती है। इसमें यह देखा जाता है कि राइस मिलर्स ने पहले जितना भी सरकारी धान लिया है, इसका चावल वापस किया या नहीं। यदि किसी भी मिल संचालक ने चावल वापस नहीं किया तो उसे अगली बार धान नहीं दिया जाता।
इसी तरह से यदि कोई मिल संचालक बैंक से डिफॉल्टर है तो इस स्थिति में भी उसे सरकारी धान नहीं दिया जाता। अब इस सूरत में कैसे मुरली को सरकारी धान हैफेड ने दे दिया, इसकी जांच निश्चित ही होनी चाहिए। क्योंकि जिस संचालक ने पहले ही चावल वापस नहीं किया, इस बात की क्या गारंटी वह इस बार चावल वापस कर देगा।
पहले भी आ चुके कई मामले सामने
करनाल में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब मिल संचालक बैंक और सरकारी विभाग दोनों के डिफॉल्टर जानबूझ कर हो जाते हैं। कई मामले तो ऐसे भी आए कि मिल संचालक सरकारी धान बेच कर भाग जाते हैं। बाद में उनकी रिकवरी भी नहीं होती। इस तरह से सरकार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बाद भी ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए संजीदगी नहीं बरती जा रही है।
सीएम को लिखा पत्र
संजीव ने इसको लेकर सीएम मनोहर लाल को भी पत्र लिखा, इसमें पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए यह भी मांग की जिस भी अधिकारी ने मुरली को धान अलॉट किया, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। जिससे धान में आ रहे साल दर साल के भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।

