आईटीओ बैराज: हरियाणा चीफ इंजीनियर ने अपने सस्पेंशन पर हाईकोर्ट में दी सरकार को चुनौती

पंचकुला

दिल्ली में आयी बाढ़ के लिए आईटीओ बैराज के हरियाणा सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर संदीप तनेजा को सरकार ने सस्पेंड कर दिया था। उन्होंने अपने सस्पेंशन को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। तनेजा पर आरोप है कि आईटीओ के बैराज के गेटों के संचालन में लापरवाही बरती गई थी। बैराज के गेटों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी हरियाणा के सिंचाई विभाग की थी।

कमेटी की रिपोर्ट के बाद किया था स्सपेंड

दिल्ली में आयी बाढ़ पर जब बैराज की जांच की तो पाया कि इसके गेट बंद थे। हरियाणा सरकार ने एक कमेटी गठित की थी। कमेटी को यह तय करना था कि बैराज के गेट बंद के लिए जिम्मेदार कौन है? कमेटी की रिपोर्ट के बाद चीफ इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया था।

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कोर्ट में चीफ इंजीनियर ने दावा किया है कि इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार द्वारा गठित कमेटी ने अपनी बात रख दी थी। इसके बाद भी कमेटी ने टैक्निकल प्वांइट पर विचार किए बिना ही कार्यवाही कर दी है। कमेटी ने रिकॉर्ड और दस्तावेजी सबूतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।

कौन-कौन था जांच कमेटी में शामिल

दिल्ली में बाढ़ की स्थिति पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने जांच के लिए इंजीनियर-इन-चीफ राकेश चौहान की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी में सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ सतबीर कादियान और चीफ इंजीनियर सुरेश कुमार यादव सदस्य के रूप में शामिल थे। रिपोर्ट में कमेटी ने पाया कि ये गेट करीब 12 फीट तक बाढ़ में डूब गए थे। इसके अलावा उनमें गाद भी भर गई थी। गेट तभी खुल सकते थे, जब बरसात से पहले गाद निकालने का काम होता। इसके साथ ही गेटों की मरम्मत भी होनी चाहिए।

कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार ने चीफ इंजीनियर संदीप तनेजा को सस्पेंड कर दिया है। जबकि विभाग के वरिष्ठ अभियंता तरूण अग्रवाल और कार्यकारी अभियंता मनोज कुमार को आरोप पत्र देने के आदेश जारी किये गये हैं। इसके साथ ही यमुना बैराज पर तैनात एसडीओ मुकेश वर्मा को चार्जशीट कर दिया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने उठाया था बैराज के गेट बंद होने का मुद्दा

8 और 9 जुलाई को भारी बारिश की वजह से यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से तीन लाख 72 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। इससे पानी बहुत भारी मात्रा में आया और दिल्ली में आईटीओ के पास बैराज के 32 में चार गेट समय पर नहीं खुलने की वजह से पानी आगे नहीं जा सका। इससे दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव हो गया।

दिल्ली के सीएम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने आरोप लगाया कि इन गेटों के संचालन का जिम्मा हरियाणा सरकार के पास है। सरकार इन गेटों का ठीक ढंग से रखरखाव नहीं करती है। इस वजह से चार गेट नहीं खुल पा रहे हैं। यदि चारों गेट समय पर खुल जाते तो दिल्ली से पानी तेजी से बाहर निकल जाता। दिल्ली में बाढ़ की जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की है।

जांच कमेटी ने पाई अधिकारियों की लापरवाही

  • मानसून से पहले इन अधिकारियों ने एक भी बैठक नहीं की है। नियम के मुताबिक बैठक होनी चाहिए और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी चाहिए।
  • साल 2020 से यमुना के जलस्तर का रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
  • साल 2020 से बैराज के गेट के संचालन का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
  • पिछले वर्ष दिल्ली सरकार के पत्र लिखने के बावजूद गेटों का बिजली कनेक्शन चालू नहीं करवाया।

जांच कमेटी ने बताई दिल्ली सरकार की भी लापरवाही

जांच कमेटी ने दिल्ली सरकार की भी लापरवाही पाई है। यमुना के रास्तों पर दशकों से बड़े स्तर से अतिक्रमण है। इसकी वजह से दिल्ली में बाढ़ का पानी घुसा। गेटों के सामने बड़ी मात्रा में गाद जमा है, जिसे कई सालों से साफ नहीं करवाया गया। कमेटी ने मानसून से पहले सीईवाईडब्ल्यूएस को सिंचाई व बाढ़ से जुड़े दिल्ली, यूपी व संबंधित विभागों से समन्वय बनाते हुए एक तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है।

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