Panipat : जीते जी तो हर कोई दूसरों की सेवा करता रहता है, लेकिन मरने के बाद भी अगर हमारा शरीर दूसरों के काम आ जाए, तो इससे बड़ा कोई पुण्य का कार्य नहीं हो सकता। ऐसा ही एक महान कार्य करके दिखाया है, किला कालोनी में रहने वाली 70 वर्षीय रमेश रानी ने।
जानकारी देते हुए जन सेवा दल(Jan Seva Dal) के सदस्य चमन लाल गुलाटी ने बताया कि किले कालोनी में रहने वाली 70 वर्षीय रमेश रानी(Ramesh Rani) बचपन से ही दिन रात आनंदपुर कुटिया(Anandpur Kutiya) में सेवा करती रहती थी। सेवा भाव के चलते हुए शहर वासियों को ज्यादा से ज्यादा सेवा कार्यों में जुड़े रहने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने बताया कि सोमवार रात रमेश रानी ने अपने घर पर अंतिम सांस ली और प्रभु चरणों में लीन हो गई। माता के अंतिम इच्छा अनुसार माता के भाई और भतीजे ने माता के अंतिम इच्छा पर फूल चढ़ाते हुए माता का शरीर इसराना मेडिकल कॉलेज(Medical College) में दान किया।

गुलाटी ने कहा कि सत्संग के माध्यम से बताते थे कि यह शरीर नश्वर है, हमें जीते जी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करनी चाहिए, क्योंकि इससे बड़ा कोई पुण्य का कार्य नहीं हो सकता। जीते जी खून दान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता और मरने के बाद शरीर दान महादान है। ऐसा करने से दो अंधेरी जिंदगियों को रोशनी भी मिलती है और शरीर पर रिसर्च कर 10 डॉक्टर तैयार होते हैं, जो आगे चलकर मरीजों का इलाज करते हैं और धरती पर भगवान का रूप में रूप में कार्य करते हैं। जन सेवा दल प्रधान कृष्णा मनचंदा, कमल गुलाटी, कपिल ग्रोवर, श्यामलाल, अशोक अरोड़ा, अशोक कपूर की ओरिजिनल की पूरी टीम ने सहयोग किया।







