पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव ने रविवार को आर्य कॉलेज के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार(Seminar) का आयोजन कर पुलिस(Police) अधिकारियों व कर्मचारियों को तीनों नए कानूनों(New Law) के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया।
इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संदीप चौहान, जिला न्यायवादी राजेश चौधरी, उप पुलिस अधीक्षक सतीश कुमार गौतम, उप पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह, उप पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार, उप पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार, एफएसएफ टीम इंचार्ज डॉक्टर नीलम आर्य भी उपस्थित रही। पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने संबोधित करते हुए कहा कि तीन नए कानून भारतीय न्याय सहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता 2023 व साक्ष्य अधिनियम 1 जुलाई 2024 से लागू हो रहे है। जो भारतीय दंड सहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे। पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए नए कानूनों की जानकारी अनिवार्य है। सभी पुलिसकर्मी इनका गहनता से अध्ययन करें। नए कानूनों में दिए गए प्रावधानों में प्रत्येक कार्रवाई के लिए निश्चित समय सीमा निधारित की गई है।

नए कानून के अनुसार पुलिस को शिकायत मिलने के तीन दिन के अंदर एफआईआर(FIR) दर्ज करनी होगी। जिन केसों में 3 से 7 साल का प्रावधान है उन केसों में प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज करनी होगी। एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़ित को मुकदमें की प्रगति बारे एसएमएस या अन्य इलेक्ट्रोनिक्स माध्यमों द्वारा 90 दिनों के अंदर अंदर जानकारी प्रदान की जाएगी।
अपराध की कमाई से अर्जित संपत्ति होगी अटेच
नए कानून में संगठित अपराध पर विशेष प्रावधान है। संगठित गैंग, सिंडिकेट चलाने वाले गिरोह के आरोपियों द्वारा अपराध कर काली कमाई से अर्जित की संपत्ति को अटेच करने के प्रावधान बारे विशेष रूप से दिया गया। अब जांच अधिकारी पुलिस अधीक्षक महोदय के माध्यम से न्यायालय में अपील कर आरोपियों की इस प्रकार से अर्जित की संपत्ति अटेच करवा सकेगा। पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने तीनों नए कानूनों में दिए प्रावधानों को पुलिकर्मियों को सरलीय भाषा में समझाकर जागरूक किया।

तीनों कानूनों की दी विस्तार से जानकारी
अतिरिक्त जिला एव सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव ने सेमिनार में पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए तीनों नए कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियोग को अंकित करते समय कानून की पूरी तरह से जानकारी ग्रहण करें और अभियोग से संबंधित पूरे साक्ष्यों को एकत्रित किया जाए, ताकि साक्ष्य के अभाव में गुनाह करने वाला व्यक्ति किसी भी सूरत में सजा से न बच पाए।
एफएसएल टीम द्वारा क्राइम सीन निरीक्षण करना अनिवार्य
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संदीप चौहान ने इस दौरान पुलिसकर्मियों को तीनों नए कानूनों के बारे में जानकारी देते हुए साक्ष्य अधिनियम की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत जांच की गुणवता में सुधार करते हुए जघंन्य अपराधों में एफएसएल टीम द्वारा क्राइम सीन निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है। तलाशी के दौरान बरामदगी की रिकार्डिंग करनी होगी। माननीय न्यायायल में वर्चुअल माध्यम से भी गवाही व पेशी हो सकेंगी।
अब बीएनएस में 103 धारा के तहत होगी दर्ज
जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने सेमिनार में भारतीय न्याय सहिता 2023 की धाराएं के बारे में की जानकारी दी। नए कानून बीएनएस के बारे जानकारी देते हुए बताया कि आईपीसी में हत्या का अभियोग 302 धारा के तहत दर्ज किया जाता है, इसको अब बीएनएस में 103 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। दुष्कर्म को 376 धारा में दर्ज किया जाता है बीएनएस में 64 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। इसी प्रकार अन्य धारा के नंबरों में बदलाव किया गया। भारतीय दंड सहिता में (आईपीसी) में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 358 धाराएं रह गई है। सेनीनार में सभी थाना प्रबंधक, क्राइम युनिट इंचाजर्, चोकी इचार्ज व काफी सख्या में अन्य पुलिकर्मी मौजूद रहे।







