Panipat : अशोक नगर मार्केट एसोसिएशन द्वारा कामरेड पुष्पेंद्र शर्मा (Comrade Pushpendra Sharma) की अध्यक्षता में शहीद भगत सिंह राजगुरु व सुखदेव का बलिदान दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि आज हम खुली हवा आजादी का जशन मना रहे हैं, वह इन शहीदों की कुर्बानी की वजह से है।
कामरेड पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि जिस शादी लाल ने भगत सिंह के खिलाफ झूठी गवाही दी थी। शादी लाल को गांव वालों का ऐसा तिरस्कार झेलना पड़ा कि उसके मरने पर जिला मुजफ्फरनगर में किसी भी दुकानदार ने अपनी दुकान से कफन का कपड़ा तक नहीं दिया। शादी लाल के लड़के उसका कफन दिल्ली से खरीद कर लाए, तब जाकर उसका अंतिम संस्कार हो पाया था। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का नाम हर देश प्रेमी युवा जरूर जानता है।

उन्होंने कहा कि ये तीनों ही युवाओं के लिए आदर्श और प्रेरणा है। इसी वजह इनका पूरा जीवन है, जिसे इन तीनों वीरों ने देश के नाम कर दिया। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दे दी थी। उन्हें लाहौर षड़यंत्र के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस मौके पर कामरेड पुष्पेंद्र शर्मा, हीरालाल कपूर, अशोक नगर रेसिडेंट वेलफेयर प्रधान सोनू शर्मा, अशोक नगर मार्केट प्रधान दविंद्र सिंह, सुखविंद्र सिंह, राजेश शर्मा, मंडल अध्यक्ष हरीश कटारिया, सुभाष खट्टर, वीरेंद्र तनेजा, वैभव शर्मा अधिवक्ता, अशोक आदि उपस्थित रहे।

प्रेमभाव के साथ मनाएं होली : पुष्पेंद्र
वहीं कामरेड पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि होली का त्यौहार पुराने वैरभाव को खत्म करने का त्यौहार है। जबकि आजकल की युवा पीढ़ी इसे हुडदंगबाजी में तब्दील करने का प्रयास करती हैं। युवाओं को ऐसा न करके प्रेमभाव के साथ होली का त्यौहार मनाना चाहिए। साथ ही भद्दे रंगों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए, जिससे किसी की त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचे।

सेंट्रल असेंबली में फेंके बम
बाजार प्रधान दविंद्र सिंह ने युवाओं को बताया कि भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने आठ अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम फेंके और आजादी के नारे लगाने लगे। वे दोनों वहां से भागे नहीं, बल्कि बम फेंकने के बाद गिरफ्तारी दी। इस दौरान उन्हें करीब दो साल की सजा हुई।

क्रांतिकारी लेख लिखते थे भगत सिंह
आरटीआई एक्टिविस्ट अंशु नारंग ने कहा कि जेल में करीब दो साल रहने के दौरान भगत सिंह क्रांतिकारी लेख लिखा करते थे और अपने विचारों को व्यक्त करते थे। उनके लेखों में अंग्रेजों के अलावा कई पूंजीपतियों के नाम भी शामिल थे, जिसे वह अपना और देश का दुश्मन मानते थे। भगत सिंह ने अपने एक लेख में लिखा था कि मजदूरों का शोषण करने वाला उनका शत्रु है, वह चाहे कोई भारतीय ही क्यों न हो।


