Haryana News : हरियाणा के जिला रोहतक में सालभर की मेहनत के बाद खून पसीना एक कर उगाया गया किसान का पीला सोना सड़क पर बिखरा पड़ा हुआ है। रोहतक जिले के गांव मदीना में अनाज मंडी में जगह न होने के चलते किसान सड़क पर अपनी फसल डालने पर मजबूर हैं। गांव मदीना की अनाज मंडी में जगह नहीं होने पर किसानों ने करीबन ढ़ाई किलोमीटर तक सड़क पर गेहूं की फसल डाल रखी है। बेमौसमी बारिश व ओलावृष्टि से बची किसानों की फसल अब सड़कों पर बिखरी नजर आने लगी है। जिससे किसानों में सरकार और प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन के दावे पूरी तरह से झूठे साबित हो रहे हैं और उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल पा रही। जिले में करीब 8 अनाज मंडी हैं। किसानों के लिए हर साल बेहतर सुविधा का दावा करने वाले रोहतक प्रशासन की एक बार फिर से पोल खुल गई है। साल भर कड़ी मेहनत करने के बाद किसान सड़क पर अपना पीला सोना यानि गेहूं डालने पर मजबूर हो रहे हैं। हर साल मंडियों से इस तरह की तस्वीर सामने आती है। रोहतक जिला प्रशासन बार-बार बेहतर सुविधा किसानों को देने का दावा करता है, लेकिन तस्वीर सब कुछ बोलती है।

रोहतक जिले के गांव मदीना के लिंक रोड पर करीब ढ़ाई किलोमीटर तक किसान अपनी गेहूं की फसल सड़क पर डालने पर मजबूर हैं। अनाज मंडी में जगह न होने के चलते मजबूरी में किसान सड़कों पर गेहूं डाल रहे हैं। अब बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के नुकसान से बची थोड़ी बहुत फसल अब किसान सड़कों पर डाल रहे हैं, क्योंकि मंडियों में जगह नहीं है। किसानों का कहना है कि वह दुर्दशा को लेकर काफी मजबूर हैं। इस वक्त खेतों में गेहूं की कटाई का समय है, लेकिन उन्हें मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं और न ही मशीन।
किसान राजबीर, सीलू और आढ़ती सुधीर का कहना है कि मुश्किल से गेहूं की कटाई करके मंडियों में लेकर जाते हैं तो वहां भी जगह नहीं होती। उनका कहना है कि पोर्टल में उलझकर काफी समय बर्बाद होता है, जबकि इस वक्त किसानों के पास समय नहीं होता। प्रशासन बार-बार दावा करता है कि किसानों को बेहतर सुविधाएं दी जाती है, लेकिन तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह से सड़क पर किसान की सालभर की मेहनत बिखरी पड़ी है।





