➤हरियाणा की पहलवान तपस्या गहलावत ने जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप जीती
➤बुल्गारिया के समोकोव में 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक, नॉर्वे की पहलवान को हराया
➤दादा और पिता के सपने को साकार किया, अब सीनियर विश्व चैंपियनशिप की तैयारी
सुशील मोर
सोनीपत की पहलवान तपस्या गहलावत ने बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित अंडर-20 जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया। 57 किग्रा भार वर्ग में तपस्या ने नॉर्वे की फेलिसिटास डोमजेवा को 5-2 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि दादा के सपने और पिता के अधूरे ख्वाब को साकार करने का प्रतीक भी है।

तपस्या का यह सफर संघर्षों और त्याग की मिसाल है। उनके पिता प्रमेश गहलावत खुद एक अच्छे पहलवान रहे लेकिन चोट के कारण उनका करियर अधूरा रह गया। बेटी के लिए उन्होंने वही सपना जिया और उसका नाम ही ‘तपस्या’ रखा। मां नवीन कुमारी और पिता दोनों ने बेटी की ट्रेनिंग के लिए पूरी व्यवस्था की। पिता ने खेतीबाड़ी छोड़कर अखाड़े के पास घर बसाया, ताकि बेटी को सर्वोत्तम प्रशिक्षण मिल सके।

तपस्या की जीत तक का रास्ता आसान नहीं था। शुरुआती मुकाबले में उन्होंने डोल्जोन त्सिन्गुएवा को 6-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में फ्रांस की रोमाइसा एल खारूबी को हराकर आगे बढ़ीं। सबसे कठिन परीक्षा सेमीफाइनल में जापान की सोवाका उचिदा के खिलाफ थी, जहां उन्होंने अंतिम क्षणों में 4-3 से जीत दर्ज की। फाइनल में तपस्या ने नॉर्वे की पहलवान को मात देकर स्वर्ण पदक जीता।


प्रशिक्षक युद्धवीर राणा ने बताया कि तपस्या का प्रशिक्षण 2019 से युद्धवीर अखाड़े में हो रहा है। कोच कुलदीप राणा और समीक्षा खरब की देखरेख में तपस्या ने मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया। तपस्या ने मात्र 10 वर्ष की उम्र में पहली बार स्टेट स्कूल चैंपियनशिप जीती थी और तब से ही उनका प्रदर्शन निरंतर शानदार रहा है।
तपस्या अब सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की तैयारी में जुट गई हैं। क्रोएशिया के जाग्रेब में होने वाली इस प्रतियोगिता में वह भारतीय टीम की अहम सदस्य होंगी। इससे पहले वह जयपुर में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत, बैंकॉक में एशियाई अंडर-20 में स्वर्ण और कई अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।