चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर Supreme Court ने सोमवार (27 जनवरी) को अहम आदेश दिए। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीडियोग्राफी कराने और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को स्वतंत्र ऑब्जर्वर नियुक्त करने के निर्देश दिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मेयर चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र माहौल में होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से पूछा था कि वोटिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किया जा सकता है या नहीं। अदालत ने मौजूदा मेयर कुलदीप कुमार की ओर से हाथ खड़े करवाकर वोटिंग कराने की मांग को लेकर चिंता व्यक्त की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए रिटायर्ड जज की नियुक्ति के आदेश दिए।
कांग्रेस को झटका
इसी बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जब वार्ड 27 की कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत ने BJP का दामन थाम लिया। उन्होंने भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा नेता जोगिंद्र मल्होत्रा, संजय टंडन और मेयर पद की उम्मीदवार हरप्रीत कौर बबला भी मौजूद थीं।
बीते विवादित चुनाव की यादें ताजा
चंडीगढ़ मेयर चुनाव का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2023 के चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। तब AAP–कांग्रेस गठबंधन के पास बहुमत था, लेकिन चुनाव अधिकारी अनिल मसीह ने AAP–कांग्रेस के 8 वोट इनवैलिड करार दे दिए। इससे भाजपा के मनोज सोनकर को विजेता घोषित कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में जब मामला पहुंचा, तो चुनाव की CCTV फुटेज में मसीह जानबूझकर AAP–कांग्रेस के वोट खराब करते नजर आए। कोर्ट ने इनवैलिड वोटों की दोबारा गिनती के आदेश दिए, जिसके बाद AAP के कुलदीप कुमार को मेयर चुना गया।
भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत नहीं
वर्तमान में भाजपा 16 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस के पास 7 वोट (सांसद मनीष तिवारी समेत), जबकि AAP के पास 13 पार्षद हैं। इस समीकरण के बावजूद कांग्रेस-AAP गठबंधन का बहुमत है, जिससे मेयर चुनाव में फिर से बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।







