Faridabad 38वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में देश-विदेश की संस्कृति और शिल्प कला के अनूठे दर्शन हो रहे हैं। इस वर्ष मेला ओडिशा और मध्यप्रदेश थीम स्टेट के रूप में सुसज्जित किया गया है, जबकि बिम्सटेक (BIMSTEC) संगठन के देशों की संस्कृति भी यहां देखने को मिल रही है।

मेला परिसर में विशेष रूप से निर्मित बिम्सटेक पवेलियन को लेकर पर्यटकों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यह पवेलियन चौपाल के पीछे स्थित है और इसमें विभिन्न देशों की कला व संस्कृति की झलक प्रदर्शित की गई है। इस वर्ष बिम्सटेक संगठन से जुड़े भारत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, घाना और अफगानिस्तान सहित अन्य सदस्य देशों को विशेष भागीदार बनाया गया है। इनके साथ लगभग 51 अन्य देश भी मेले का हिस्सा बने हैं। इंटरनेशनल पवेलियन में 30 से अधिक देशों ने अपने स्टॉल लगाए हैं, जहां पर्यटक विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विशेषताओं को नजदीक से देख और अनुभव कर सकते हैं।

ट्यूनीशिया के शिल्पकारों की लकड़ी की अद्भुत कला
38वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में भारतीय शिल्पकारों के साथ-साथ विदेशी शिल्पकार भी अपनी उत्कृष्ट कलाओं से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बिम्सटेक पवेलियन के अंतर्गत ट्यूनीशिया के शिल्पकारों द्वारा स्टॉल नंबर एफ.सी.-43 पर जैतून की लकड़ी (ऑलिव वुड) से निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई है, जो पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है।
ट्यूनीशिया के एक शिल्पकार ने बताया कि वे जैतून की लकड़ी से विभिन्न प्रकार के सजावटी और उपयोगी सामान बनाते हैं। इन वस्तुओं को बनाने में 2 से 4 दिन का समय लगता है। उन्होंने अपने स्टॉल पर लकड़ी से बने झूले, कॉफी सेट, टी सेट, कुर्सियां, फ्लावर पॉट, घड़ियां और कॉर्नर स्टूल सहित कई अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। शिल्पकारों द्वारा निर्मित इन वस्तुओं की नक्काशी और बारीक कारीगरी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है।

पर्यटकों की भारी भीड़ और शानदार खरीदारी
मेले में पर्यटक विभिन्न देशों की अनूठी शिल्पकला को देखने और खरीदारी करने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। विदेशी शिल्पकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए उत्पादों की बारीक नक्काशी और बेहतरीन डिजाइन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
यह मेला भारतीय और विदेशी शिल्पकारों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे अपनी कला और संस्कृति को साझा कर सकते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि यहां हर वर्ष नई थीम और अनूठे हस्तशिल्प प्रदर्शित किए जाते हैं, जिससे यह पर्यटकों के लिए और भी रोचक बन जाता है।

38वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस बार कला, संस्कृति और शिल्पकला का जो संगम देखने को मिल रहा है, वह न केवल भारत बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक यादगार अनुभव बन रहा है।







