फसलों पर एमएसपी की गारंटी, किसानों और मजदूरों की कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन 2022 बिल रद्द सहित अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठे हरियाणा और पंजाब के किसानों ने धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि पंजाब के राज्यपाल ने बैठक में एमएसपी सहित सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। बता दें कि किसानों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 26 नवंबर को तीन दिवसीय महापड़ाव शुरू किया था। हरियाणा और पंजाब के किसान पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित धरनास्थल पर एकत्रित हुए थे।
मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले संघर्ष कर रहे किसानों ने मंगलवार को अपना धरना समाप्त कर दिया है। इससे पहले यूनियन के नेताओं ने पंजाब के कृषि मंत्री गुरप्रीत सिंह खुंडिया से मुलाकात की। इस दौरान कृषि मंत्री गुरमीत खुडि्डयां के सामने किसानों ने अपनी मांगों को रखा। बैठक में तय किया गया कि किसान 4 दिसंबर को एक मेमोरेंडम सरकार को सौंपेंगे। जिसमें उन सभी मांगों का जिक्र होगा, जो वह सरकार से पूरी करवाना चाहते हैं। इसके बाद 19 दिसंबर को किसानों की पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक करवाई जाएगी। इस बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। इस दौरान किसानों की मांगों को सुना जाएगा और उनका हल करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही साफ कर चुके हैं कि किसानों के साथ किसी प्रकार की नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद किसान राजभवन पहुंचे और राज्यपाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद किसानों को मिले आश्वासन पर उन्होंने धरने समाप्त करने का एलान किया।

21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
वहीं पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित धरनास्थल पर धरने पर बैठे किसानों का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हरियाणा के राज्यपाल से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसके बाद किसान नेता रतन मान ने कहा कि किसान 11 दिसंबर तक सरकार के रुख का इंतजार करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। पंचकूला में करीब एक हजार किसान मौजूद रहे। मान ने बताया कि राज्यपाल ने किसानों को कीमती समय देकर उनकी मांगों को ध्यान से सुना और उनके मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद तीन दिन से पंचकूला में चल रहे धरने को किसानों ने खत्म करने का फैसला लिया।

किसान नेता का कहना है कि राज्यपाल ने किसानों को आश्वासन दिया है कि सरकार के पास ज्ञापन भेजकर मांगें पूरी करवाने का काम किया जाएगा। राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून, लखीमपुर खीरी मामले में इंसाफ, गिरफ्तार किसानों की रिहाई, पराली और बिजली बिल के साथ ही कर्ज माफी पर भी बात की गई है। मान ने कहा कि 11 दिसंबर को हिसार में बैठक कर आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।

जल्द मांगें नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे किसान
किसान नेता सुरेश कोथ का कहना है कि किसानों की ओर से मोदी सरकार को चेतावनी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे। सुरेश कोथ ने कहा कि किसान इस देश का मालिक है और आगे भी लड़ने को तैयार है। पिछले करीब दो साल के दौरान किसान संगठन की ओर से केंद्र सरकार को 15 ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी बात को दरकिनार कर दिया गया। यदि समय रहते उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो किसान बड़ा आंदोलन शुरू करने से नहीं हिचकेंगे।

किसानों ने इन प्रमुख मांगों को लेकर किया गया महापड़ाव
महापड़ाव को लेकर किसानों की कई प्रमुख मांगें शामिल रही। जिनमें सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों व मजदूरों की कर्जा मुक्ति, बिजली संशोधन बिल 2022 रद्द करने, चार लेबर कोड निरस्त, न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी का भुगतान करने की मांग की गई। किसान-मजदूरों को गुजारे लायक 10,000 रुपये पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास की गारंटी देने, सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण बंद करने और अस्थाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। साथ ही पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग शामिल है।

