➤चरखी दादरी में दो चचेरे भाइयों की ट्रेन की चपेट में मौत
➤मालगाड़ी की आवाज में सवारी गाड़ी का शोर दबा, नहीं सुन पाए
➤जीआरपी ने इत्तफाकिया मौत मानकर पोस्टमॉर्टम के बाद शव सौंपे
चरखी दादरी जिले के गांव घिकाड़ा में मंगलवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। खेतों में सिंचाई करने गए दो चचेरे भाई रेलवे ट्रैक पर बैठने के दौरान सवारी गाड़ी की चपेट में आ गए। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान घिकाड़ा निवासी 38 वर्षीय संदीप और 35 वर्षीय मंदीप के रूप में हुई है।

सिंचाई के बाद बैठे थे रेलवे ट्रैक पर
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह दोनों भाई धान की फसल में पानी चलाने के लिए खेत गए थे। काम पूरा करने के बाद वे पास ही बने रेलवे ट्रैक पर आकर बैठ गए। सुबह करीब साढ़े 8 बजे अचानक पास वाले ट्रैक पर एक मालगाड़ी गुजरी। दोनों का ध्यान उसी ओर चला गया। मालगाड़ी के शोर में उन्हें सामने से आ रही सवारी गाड़ी की आवाज सुनाई नहीं दी और देखते ही देखते वह दोनों को अपनी चपेट में ले गई।

ट्रेन ड्राइवर ने दी हादसे की सूचना
हादसे के तुरंत बाद सवारी गाड़ी के ड्राइवर ने इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी। स्टेशन मास्टर ने तुरंत जीआरपी को जानकारी दी। सूचना मिलते ही जीआरपी प्रभारी एसआई कृष्ण कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शवों को कब्जे में लिया। पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिए।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
दोनों के शव दादरी सिविल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए लाए गए, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह एक इत्तफाकिया हादसा है। जीआरपी चौकी प्रभारी कृष्ण कुमार ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि मृतकों के चाचा सुरेंद्र व राजेश के बयान दर्ज कर इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई की गई है।
संदीप था परिवार का सहारा, एक बेटे का पिता
हादसे ने दो परिवारों से उनके चिराग छीन लिए। मृतक संदीप तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसकी एक बहन और एक भाई है। वह शादीशुदा था और एक छोटे बेटे का पिता भी है। घर की जिम्मेदारी मुख्यतः उसी पर थी। वहीं, उसका चचेरा भाई मंदीप तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था और अविवाहित था। दोनों ही खेतीबाड़ी करते थे और परिवार का सहारा माने जाते थे।
गांव में छाया मातम
दो चचेरे भाइयों की अचानक हुई मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। एक परिवार ने अपने बेटे और पिता को खो दिया, जबकि दूसरा परिवार अपने छोटे बेटे से हमेशा के लिए वंचित हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के पास खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए सुरक्षा उपाय किए जाने जरूरी हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।