ठंड और कोहरे से किसानों के गेहूं उत्पादन में नुकसान होने की संभावना है। कृषि उपनिदेशक ने गेहूं उत्पादन किसानों को सलाह दी है की वो जनवरी महीने में फसल का ज्यादा ध्यान रखे। गेहूं पर पीला रतुवा रोग आने पर जिंक सल्फेट और यूरिया के घोल का छिड़काव अवश्य करें।
उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही रही। अधिकतम ठंड से जहां जन जीवन अस्त व्यस्त है तो वहीं कोहरे और ठंड ने अब किसानों की चिंता को भी बड़ा दिया है। वैसे तो कोहरा और सर्दी गेहूं उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद साबित होता है। लेकिन कई दिनों से मौसम ना खुलने से गेहूं की फसल पर इसका असर पड़ सकता है।
धूप न निकले से गेंहू में पीला रतुवा आने की संभावना
कृषि उपनिदेशक डॉ. आत्माराम गोदार के अनुसार तापमान में कमी और कई दिनों से धूप ना निकलने से गेहूं में पीला रतुवा आने की संभावना ज्यादा हो जाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है की किसान गेहूं में पीला रतुवा बीमारी के प्रति जनवरी की शुरुआत से ही सतर्क रहे। अगर गेहूं की फसल में पत्तियों पर समांतर पीले व नारंगी धब्बे एक लाईन में दिखाई दे तो यह रोग की शुरुआत है। रोग अधिक होने पर यह धब्बे पीले रंग के हल्दीनुमा पाउडर में बदल जाते है। शुरुआत में यह बीमारी खेतों में किसी-किसी स्थान पर आती है और आखिरी स्टेज में पत्तिया काली हो जाती है। उन्होंने कहा की यमुनानगर मे पिछले कुछ दिनों से धूप ना निकलने के कारण यह बीमारी गेहूं में आ सकती है।

किसान जिंक और यूरिया का घोल बनाकर फसल पर करें छिड़काव
गोदारा ने कहा की किसानों को चिंता करने की जरूरत नही है। किसान जिंक और यूरिया का घोल बना कर फसल पर छिड़काव कर सकते है। इसके अलावा गेहूं की पतियों पर जब हरापन आ जाए तो उसमे आयरन की कमी हो जाती है उसके लिए किसानों को हरा कशिश पाउडर का छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा इस तरह से छिड़काव करने से गेहूं में फुटाव नही आयेगा और गेहूं का उत्पादन भी बड़ेगा। कृषि उपनिदेशक ने कहा की पिछले दिनों टीम ने यहां सर्वे भी किया था। फिलहाल सर्वेक्षण में कही पर भी पीला रतुवा नहीं पाया गया। वहीं उन्होंने कहा की गेहूं की फसल के लिए ठंड का मौसम अच्छा होता है, जीतना अधिक ठंड और कोहरा पड़ेगा गेहूं का उत्पादन उतना अच्छा होगा। लेकिन मौसम ना खुलने और धूप ना निकलने से फसल में इस तरह का रोग आ जाता है।