➤क्रीम बिस्किट में ट्रांस फैट, शुगर और कई हानिकारक केमिकल्स
➤बच्चों में मोटापा, ग्रोथ में देरी, पाचन और इम्यूनिटी कमजोर
➤हेल्दी विकल्प: ओट्स, नट बटर, मखाना, साबुत अनाज स्नैक्स
भारत में क्रीम बिस्किट्स का सेवन बड़े पैमाने पर किया जाता है। चाय या कॉफी के साथ, या खाने के बाद मीठा खाने की आदत में ये बिस्किट्स अक्सर शामिल होते हैं। हालांकि, जितने स्वादिष्ट ये बिस्किट्स लगते हैं, उतने ही स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी हैं।
क्रीम बिस्किट्स में इस्तेमाल की गई क्रीम असल में डेयरी क्रीम नहीं होती। यह नकली नॉन-डेयरी मिश्रण होता है, जिसमें सस्ते और हानिकारक केमिकल्स, ट्रांस फैट और शुगर सिरप शामिल होते हैं। बिस्किट की क्रीम बनाने के लिए पहले वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह क्रीम जैसी दिखती है। फिर इसे मीठा बनाने के लिए शुगर सिरप मिलाया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर डाले जाते हैं, और अंत में प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं ताकि बिस्किट्स की शेल्फ लाइफ बढ़ सके।
ट्रांस फैट के नुकसान:
क्रीम बिस्किट्स में ट्रांस फैट सबसे हानिकारक तत्व है। यह शरीर में ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाता है और ‘अच्छा’ कोलेस्ट्रॉल (HDL) घटाता है। लंबे समय तक सेवन से हार्ट अटैक, दिल की बीमारियां, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज और शरीर में इन्फ्लेमेशन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
बच्चों के लिए खतरा:
बच्चों में ट्रांस फैट का सेवन और भी नुकसानदेह होता है। यह पेट और कमर के आसपास मोटापा बढ़ाता है, लिवर की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है, और बच्चों की ग्रोथ में देरी कर सकता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को प्रभावित करता है, जिससे पाचन बिगड़ता है और इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।
शुगर सिरप, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर के नुकसान:
शुगर सिरप तेजी से ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ाता है, इंसुलिन स्पाइक करता है, और ओबिसिटी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बन सकता है। आर्टिफिशियल फ्लेवर न्यूरोलॉजिकल असर डाल सकते हैं, बच्चों में ADHD, हाइपरएक्टिविटी और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। आर्टिफिशियल कलर किडनी और लिवर पर टॉक्सिक असर डाल सकते हैं, स्किन एलर्जी और सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं।
इमल्सीफायर्स और प्रिजर्वेटिव्स का असर:
इमल्सीफायर्स पेट के अच्छे बैक्टीरिया को प्रभावित कर आंतों में सूजन और लीकी गट सिंड्रोम जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्रिजर्वेटिव्स जैसे BHA, BHT और सोडियम बेंजोएट कैंसर और इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। बच्चों में व्यावहारिक बदलाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी हो सकती है।
मोटापा और मेटाबॉलिक रोगों से संबंध:
क्रीम बिस्किट्स का अधिक सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। प्रोसेस्ड बिस्किट्स में अधिक कैलोरी और कम पोषण होता है, जिससे शरीर को जरूरी तत्व नहीं मिलते। किशोरों में लगातार इस प्रकार के जंक फूड से थायरॉइड और हार्मोनल असंतुलन की समस्या देखने को मिल रही है।
हेल्दी विकल्प:
क्रीम बिस्किट्स की जगह हेल्दी स्नैक्स का विकल्प चुनना बेहतर है। ओट्स, साबुत अनाज या बाजरे से बनी कुकीज, नट बटर, खजूर और मेवे की बार्स, मूंग खाखरा, भुना चना, मखाना और सीड्स या नट्स से बने क्रैकर्स बेहतर विकल्प हैं। घर पर बने स्नैक्स, जिसमें प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड सामग्री हो, बच्चों और वयस्क दोनों के लिए सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं।
निष्कर्ष:
क्रीम बिस्किट्स केवल स्वाद में मीठे हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक। बच्चों और परिवार को इसके सेवन से बचना चाहिए और हमेशा इंग्रीडिएंट लेबल पढ़कर स्वस्थ विकल्प चुनना चाहिए।