- असम में ड्यूटी के दौरान पेड़ की टहनी गिरने से 29 वर्षीय जवान पुष्पेंद्र नेगी शहीद हो गए।
- किन्नौर के थैमगारंग गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि।
- पत्नी कीर्ति ने ताबूत से लिपटकर दी विदाई, बोलीं- “हमेशा तुम्हारे नाम से ही जिऊंगी।”

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में वीरभूमि ने एक और वीर सपूत पुष्पेंद्र नेगी को अश्रुपूरित विदाई दी। 29 वर्षीय पुष्पेंद्र, जो असम में सेना की ड्यूटी पर तैनात थे, 15 जुलाई को तेज तूफान के दौरान पेड़ की टहनी गिरने से शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर गुरुवार को पैतृक गांव थैमगारंग लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

सबसे मार्मिक दृश्य उस वक्त सामने आया जब 6 साल के बेटे एतिक ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, और पूरा गांव नम आंखों से “पुष्पेंद्र नेगी अमर रहें” के नारों के साथ अपने सपूत को अंतिम विदाई दे रहा था। पत्नी कीर्ति नेगी ताबूत से लिपट गईं और कहने लगीं, “मैं अब सिर्फ आपके नाम से ही जिऊंगी, किसी और से कोई रिश्ता नहीं जोड़ूंगी“।
पुष्पेंद्र नेगी ने 2013 में 19 डोगरा रेजिमेंट में भर्ती होकर सेना में सेवा शुरू की थी। वे 17 जून को छुट्टी पर घर आए थे और 4 जुलाई को ड्यूटी पर लौटे थे। जाते वक्त उन्होंने पत्नी से कहा था, “दो महीने बाद फिर छुट्टी पर आऊंगा“, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

पारिवारिक सदस्यों में माता सरला देवी, पिता महेंद्र नेगी, पत्नी कीर्ति और बेटा एतिक शामिल हैं। एतिक बार-बार पिता के बारे में पूछता रहा, जिससे परिवार और गांववालों की आंखें भर आईं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पुष्पेंद्र की शहादत पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश को अपने वीर सपूत पर गर्व है, उनकी शहादत को सदैव याद रखा जाएगा।”

