वाराणसी स्थित एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (NVVN) के टॉरफाइड चारकोल प्लांट का हाल ही में निरीक्षण किया गया। यह परियोजना भारत में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
इस अत्याधुनिक संयंत्र में प्रति दिन 600 टन नगरपालिका ठोस कचरे (Municipal Solid Waste) को चारकोल में बदला जाएगा। यह स्वदेशी रूप से विकसित पहली ऐसी तकनीक है, जो पारंपरिक दहन (Incineration) के मुकाबले अधिक पर्यावरण-अनुकूल है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह तकनीक कचरे को उच्च कैलोरी मूल्य वाले ईंधन में परिवर्तित करती है, जिसे कोयले के साथ सह-दहन (co-firing) में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि यह न केवल कचरे को कम करेगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में भी सहायक होगा।
यह पहल न केवल भारत में हरित ऊर्जा को नया रूप देने जा रही है, बल्कि कचरे से कोयला बनाने की यह तकनीक आने वाले समय में ऊर्जा संकट का समाधान भी बन सकती है।