हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग (DHE) ने राज्य के सरकारी कॉलेजों में प्रशासनिक कार्यों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि “विड्राल और डिस्बर्समेंट पावर” (डीडी पावर) को स्वीकार करने से इनकार करने वाले प्रिंसिपलों और फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य के कई कॉलेजों में नियमित प्रिंसिपल नहीं हैं और 40% से अधिक पद खाली हैं। ऐसे में निकासी और वितरण संबंधी अधिकार वरिष्ठ संकाय या नजदीकी कॉलेज के प्रिंसिपल को दिए जाते हैं। लेकिन विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि लोग जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं, जिससे वेतन, बिल भुगतान और फीस संग्रह जैसे जरूरी कार्य ठप हो रहे हैं।
सर्कुलर में क्या कहा गया?
हाल ही में जारी सर्कुलर में DHE ने साफ तौर पर कहा है कि
“अगर कोई अधिकारी या शिक्षक प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटेगा तो यह न केवल विभागीय आदेश की अवहेलना होगी, बल्कि इससे प्रशासनिक प्रणाली बाधित होगी। ऐसे मामलों में सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
सर्कुलर में यह भी कहा गया कि जब कोई नियमित प्रिंसिपल अनुपस्थित होता है, तो डीडी शक्तियां सबसे वरिष्ठ संकाय सदस्य या पास के कॉलेज के प्रिंसिपल को सौंपी जाती हैं। लेकिन कई बार अधिकारी जिम्मेदारी से बचने के लिए विकल्प में बदलाव की मांग करते हैं और आदेशों को तत्काल लागू नहीं करते, जिससे गंभीर प्रशासनिक व्यवधान पैदा होते हैं।
क्यों नहीं लेना चाहते शिक्षक डीडी पावर?
एक सरकारी कॉलेज प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई शिक्षक ऑडिट और वित्तीय जवाबदेही के डर से डीडी पावर लेने से कतराते हैं। उन्हें लगता है कि यदि कोई अनजानी वित्तीय गलती हो गई, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर आएगी।
इसके अलावा, शिक्षकों का कहना है कि वे प्रशासनिक प्रशिक्षण से वंचित हैं और उनके पास पहले से ही अत्यधिक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यभार है। ऐसे में डीडी पावर जैसी जिम्मेदारी उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन जाती है।
शिक्षा मंत्री ने भी मांगी रिपोर्ट
राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्य में बाधा डालने या जिम्मेदारी से भागने वाले अधिकारियों को नहीं बख्शा जाएगा।
अब आदेशों का कड़ाई से पालन जरूरी
DHE ने सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को यह निर्देश दिया है कि वे डीडी पावर संबंधी आदेशों का तुरंत और कड़ाई से अनुपालन कराएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सेवा नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जाएगी।