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Sonipat के अंकित बैंयापुरिया ने PM Narender Modi से की मुलाकात, प्रेरक यात्रा से सोशल मीडिया पर मचा रहे धूम

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सोशल मीडिया पर फिटनेस के 75 दिन के हार्ड चेलेंज से वायरल होने वाले अंकित बैंयापुरिया देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ स्वच्छता पखवाड़े में एक साथ सफाई अभियान का हिस्सा बने हैं। इन दिनों 150 दिन का फिटनेस हार्ड चेलेंज कर रहे अंकित गीता पढ़ने को लेकर मानसिक मजबूती बता रहे हैं और वही हार्ड से शारीरिक मजबूती भी प्राप्त कर रहे हैं। गरीब परिवार से निकलने वाले अंकित आज भी साधारण जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर उनके वायरल होने के बाद हरियाणा समेत देश के अलग-अलग महिला और पुरुषों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। अंकित को देखकर अब लोग प्रतिदिन अलग-अलग हार्ड चलेंगे लेकर फिटनेस कर रहे हैं। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी मोदी से मुलाकात करने को लेकर अंकित को बधाई दी है। हरियाणा के सोनीपत के मूल निवासी अंकित बैंयापुरिया 75 दिवसीय कठिन चुनौती को पूरा करने की अपनी प्रेरक यात्रा से सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे हैं। इस पूर्व पहलवान से फिटनेस प्रभावित करने वाले व्यक्ति ने अपने समर्पण और परिवर्तन के लिए काफी ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन उनकी सफलता की राह आसान नहीं थी।

13 साल पहले किया था ट्रेडिशनल रेसलिंग

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सोनीपत के गांव बैंयापुर के रहने वाले अंकित ने बताया कि उसका बैंयापुर सरनेम नहीं है, बल्कि उक्त नाम उसके गांव का नाम है। पहले ट्रेडिशनल रेसलिंग होती थी उसमें उसका यह नाम पड़ा है। फिटनेस को लेकर 13 साल पहले शुरू किया था। तभी से रेसलिंग करता आ रहा है। गांव के पहलवान कृष्ण से प्रेरणा लेकर उसने कुश्ती की शुरुआत की थी। कृष्ण पहलवान खलीफा के तौर पर जाने जाते थे। ज्यादातर कुश्ती मैट पर नहीं बल्कि मिट्टी के अखाड़े में की है। फिटनेस रखने के लिए वह कुश्ती लड़ने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं का ज्यादा ध्यान रखना पड़ रहा है।

दंगल में पहलवानी करते समय उसे एक ज्यादा इंजरी हो गई

रेसलिंग के दौरान उसे कई बार चोटे भी लगी। अपने जीवन काल में उसने कई बार लेबर का काम किया। हलवाई की दुकान पर जाकर उनके साथ काम किया, उसके बाद उसने एक निजी कंपनी में भी काम किया। वर्ष 2022 में गांव के दंगल में पहलवानी करते समय उसे एक ज्यादा इंजरी हो गई थी। इसके बाद से उसकी मनन टूटता जा रहा था। लास्ट इंजरी के दौरान उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी। सोशल साइट के जरिए उसने 75 हार्ड के बारे में जानकारी मिली। उसने उसी दिन से शुरुआत कर दी, जिसे उसे अच्छे रिजल्ट शुरू हुए थे उसने इसको अच्छे से शुरू कर दिया। अच्छे रिजल्ट मिलने के बाद दूसरों को भी बताने की सोची उसके बाद वीडियो बनाना शुरू कर दिया और उन्हें सोशल साइट पर भेजने लगे।

भागवत गीता के सहारे दोबारा प्रेक्टिस करना शुरू

अंकित ने बताया कि बार-बार चोट लगने के कारण उसका मन टूट चुका था, लेकिन उसने भागवत गीता के सहारे दोबारा से प्रेक्टिस करना शुरू कर दिया। अंकित ने बताया कि वह सबसे ज्यादा क्रेडिट भागवत गीता को देना चाहता है, क्योंकि 75 चेलेंज कोई फिजिकल चैलेंज नहीं है, बल्कि मेंटल टफनेस चैलेंज है। भगवत गीता मनुष्य को जीवन जीना सिखाती है। उसने भागवत गीता के साथ-साथ ब्रह्मचर्य का पालन करना भी फिटनेस वह मानसिक ठीक रहने का एक उदाहरण है। भगवत गीता जीवन का प्रेरणा के साथ-साथ बहुत कुछ सीखने के लिए वह जीवन बदलने के लिए हैं।

बेहद साधारण परिवार से संबंध रखते हैं
अंकित ने बताया कि वह बेहद साधारण परिवार से संबंध रखते हैं। वह पहले भी 13 साल पहले जैसे थे, आज भी वैसे ही है। उसके माता-पिता ने जीवन भर मेहनत करके उसे इस मुकाम पर पहुंचा है। मेरे माता-पिता ने जितना करने की हिम्मत न थी, उससे बढ़कर उसके पिता वह माता ने उसके लिए किया है। साथ-साथ मेहनत करने वह माता-पिता का सहयोग करने के चलते ही इस बलबूते पर वह पहुंचा है, उन्होंने कभी भी उसका मन नहीं टूटने दिया, आगे बढ़कर हमेशा उसका साथ दिया है।

लोगों का भरम तोड़ना बेहद जरूरी

अंकित ने बताया कि उसके माता-पिता अनपढ़ हैं, लेकिन उसके माता-पिता ने उन्हें पढ़ने के लिए दिन रात मेहनत की गांव के स्कूल में ही उन्होंने शुरुआती शिक्षा ली। वही उसके माता-पिता का सपना था कि उसके बच्चे कम से कम बीए तक की शिक्षा ले। वह 13 साल से वीडियो बना रहा है, लोग सोशल साइट पर वीडियो बनाकर गलत शिक्षा दे रहे थे, उसने उन्हें देखकर उन्हें ठीक वीडियो बनाकर सोशल साइट पर डालना शुरू कर दिया, लोगों का भरम तोड़ना बेहद जरूरी था, क्योंकि लोगों तक सही वह सटीक जानकारी देना, उसका मुख्य उद्देश्य है।

दूध-दही के बलबूते फिटनेस बनाई

अंकित ने फिटनेस डाइट के बारे में बताया कि शुरुआती दिनों में जो कुछ भी खाने को घर पर मिलता था, वह खा लेता था ।आर्थिक स्थिति जैसी थी उसके अनुसार ही उसका खाना पीना होता था। स्थिति ठीक होने पर उसने अपने खाने में कुछ बदलाव किया नहीं तो दूध और दही के बलबूते पर ही उसने अपनी फिटनेस बनाई है। युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए। अगर नशा वह करने लगे तो उनके साथ-साथ उनके परिवार भी बर्बाद हो जाता है।
सरकारी स्कूल में तीनों ने शिक्षा की ग्रहण

अंकित के पिता ने बताया कि अंकित बचपन से ही मेहनत करता रहता था। साथ में घरेलू काम करने के साथ-साथ वह पढ़ाई करता रहता साथ में सुबह स्कूल जाने से पहले उनकी मदद करता था। गांव के सरकारी स्कूल में ही तीनों ने शिक्षा ग्रहण की है, कभी भी पढ़ाई में कमजोर न होने के चलते परीक्षा में फेल नहीं हुआ। कहीं हलवाई की नौकरी कहीं जिम की नौकरी हलवाइयों के साथ काम करना वह जोमैटो कंपनी में काम करकेअपना जीवन व्यतीत किया।

परिवार के बच्चों का पालन पोषण किया

अंकित के पिता ने बताया कि उन्होंने खुद एट भट्टे पर काम करके परिवार के बच्चों का पालन पोषण किया है। जैसे ही अंकित बड़ा होता चला गया एट भट्टे पर उन्होंने काम छोड़ दिया था, वह खुद ही घर पर अपना काम करने लगे वह बच्चों की पढ़ाई में समय देने लगे, अंकित के पिता ने बताया जैसे उसके बेटे ने मेहनत की है, वैसे ही सभी के बच्चे भी ऐसे ही मेहनत करें। अंकित हमेशा सही खाने-पीने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था, कभी भी उसे मां व पिता ने उसे खाने-पीने की चीजों में मन ही नही की। गांव में एक प्लॉट में कीकर के पेड़ पर रस्सी बांधकर मेहनत करता है। वही गांव में युवा अंकित को लेकर मेहनत करने लगे हैं। गांव में काफी युवा पहलवान हुए हैं, वहीं गांव के कृष्ण पहलवान से प्रेरणा लेकर उसका बेटा भी पहलवान की तरफ चला गया और आज यह मुकाम हासिल किया है।