जमीन घोटाले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आज ईडी दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया। ईडी के अधिकारी दोपहर 1 बजे सीएम हाउस पहुंचेंगे। इससे पहले 20 जनवरी को ईडी ने साढ़े सात घंटे तक पूछताछ की थी।
बता दें कि रांची झारखंड में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। साथ ही ईडी कार्यालय, राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के आस-पास धारा 144 लगाया गया है। वहीं सियासी हलचल भी तेज है। मंगलवार को महागठबंधन दल के विधायकों की बैठक हुई। आज भी विधायकों की बैठक होगी। इधर 31 घंटे के लिए हेमंत सोरेन के गायब होने को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली से हेमंत सोरेन की भागने में अरविंद केजरीवाल ने मदद की, यह सहयोग वाराणसी तक था। वहीं जामा से जेएमएम विधायक सीता सोरेन ने साफ कर दिया है कि कल्पना सोरेन उन्हें सीएम के तौर पर कबूल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हेमंत सोरेन कुर्सी से हटते हैं, तो पहला दावा उनका होगा, हर बार त्याग मैं ही क्यों करूं। मामले को लेकर सीएम हाउस की सुरक्षा में बढ़ोतरी हुई है।

ईडी से पहले पहुंचने शुरू विधायक, सांसद और मंत्री
करीब एक घंटे बाद ईडी की टीम सीएम हाउस पहुंचेगी। उससे पहले सत्ताधारी दल के विधायक, सांसद और मंत्री पहुंचने लगे हैं। जेएमएम सांसद महुआ माजी, विधायक जोबा मांझी सामने के गेट से सीएम आवास में गईं। वहीं कई विधायक पीछे वाले गेट से सीएम हाउस दाखिल हुए हैं। यह स्थिति बेहद गंभीर है और राजनीतिक दलों के बीच तनाव की बढ़ती घड़ी को दर्शाती है। हेमंत सोरेन के साथ हुई ईडी की पूछताछ से पहले, सुरक्षा की बढ़ोतरी के बावजूद स्थानीय निवासियों को चिंता है कि इसका सीधा असर उन पर कैसे होगा।

झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटना
वहीं राजनीतिक उठापटक में उच्च स्तरीय जवाबदेही बनी रहती है और लोगों को सतर्क रहना चाहिए। झारखंड की राजनीति में यह घटना महत्वपूर्ण है, जिससे इस स्थानीय बच्चों को भी सीखने को मिलता है कि राजनीतिक समीक्षा और जवाबदेही की महत्वपूर्णता होती है। वहीं सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि अच्छी तरह से समझ सकें कि पूरे मामले का अंत क्या होता है और कौन कितना जिम्मेदार है।


