Gujrat के कच्छ ज़िले की अदालत ने पूर्व IAS अधिकारी प्रदीप शर्मा को सरकारी ज़मीन आवंटन में भ्रष्टाचार के मामले में 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। उनके साथ-साथ तीन अन्य सरकारी अधिकारियों को भी दोषी करार दिया गया है।
क्या है मामला?
यह केस सा पाइप्स प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी कंपनी को सरकारी ज़मीन आवंटित करने में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। जब यह अनियमितता हुई, तब प्रदीप शर्मा कच्छ के कलेक्टर थे।
उन्होंने कथित रूप से नियमों का उल्लंघन करते हुए औद्योगिक इकाई को लाभ पहुंचाने के लिए ज़मीन आवंटित की, जिससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ।
कोर्ट का फैसला
भुज की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे.वी. बुद्ध की अदालत ने शर्मा के अलावा:
- शहरी योजनाकार नटूभाई देसाई
- तत्कालीन तहसीलदार नरेंद्र प्रजापति
- तत्कालीन रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर अजीत सिंह जाला
को भी दोषी ठहराते हुए सभी को 5-5 साल की सज़ा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया।
पुराना मामला भी दर्ज
इससे पहले 2004 के एक अन्य भूमि घोटाले में भी प्रदीप शर्मा को अहमदाबाद सत्र न्यायालय ने पांच साल की सज़ा सुनाई थी।
वर्तमान सजा पहले वाले केस की सजा पूरी होने के बाद लागू होगी।
जांच और सबूत
2011 में सीआईडी क्राइम (राजकोट ज़ोन) में दर्ज हुई प्राथमिकी के आधार पर कार्रवाई शुरू हुई थी।
सरकारी वकील एचबी जडेजा के अनुसार:
- 52 दस्तावेजी सबूत
- 18 गवाहों के बयान
को अदालत ने संज्ञान में लिया।
प्रमुख बिंदु:
- मामला: कच्छ ज़िले में सरकारी ज़मीन आवंटन में घोटाला
- समय: घटना वर्ष 2003 में, एफआईआर 2011 में दर्ज
- मुख्य आरोपी: पूर्व आईएएस प्रदीप शर्मा
- सजा: 5 साल सश्रम कारावास + ₹10,000 जुर्माना
- पहले से भी एक केस में दोषी