G-20 शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में होगा। जिसमें दुनिया के बीस सबसे ताकतवर देशों के करीब 40 से ज्यादा प्रतिनिधि सम्मेलन शामिल होंगे। इनमें कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। सम्मेलन को लेकर सभी तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। विदेशों से आने वाले मेहमानों और नेताओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली के एक बड़े इलाके को छावनी में बदल दिया गया है। ड्रोन और हैलिकॉप्टरों से विभिन्न स्थानों की हवाई निगरानी की जा रही है। साथ ही करीब 1 लाख 30 हजार जवानों को सुरक्षा में तैनात किया गया है।
विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए मल्टीलेयर सिक्योरिटी कवर तैयार किया गया है। इसमें भारतीय सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, एनसीजी कमांडो और दिल्ली पुलिस की टीमें शामिल रहेंगी। दिल्ली में आज तक इतने बड़े स्तर के नेता पहले कभी इस साथ एकत्रित नहीं हुए हैं। यही वजह हैं कि सम्मेलन को लेकर जो इंतजाम किए गए हैं, वह भी अभूतपूर्व हैं। G-20 शिखर सम्मेलन में जो बड़े नेता भारत आ रहे हैं, उनमें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर ओलफ शोल्ज, ब्राजील के राष्ट्रपति लुला डि सिल्वा, जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और सऊदी अरब के सलमान बिन अब्दुल अजीज शामिल हैं।
इनके अलावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा, चीन की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री ली छियांग, रूस की ओर से वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जगह विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। साथ ही सम्मेलन को लेकर कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचना शुरू हो चुके हैं। जिन्हें दिल्ली के अलग-अलग पांच सितारा होटलों में ठहराया जा रहा है। दिल्ली के कुछ क्षेत्रों की सड़कों को चमकाने के साथ हजारों गमले लगाकर सजाया गया है।

दिल्ली में यह रहेंगी पाबंदिया
G-20 शिखर सम्मेलन को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां किसी तरह का खतरा नहीं लेना चाहती हैं, इसलिए संभावित रिस्क पर पहले ही पाबंदिया लगा दी गई हैं। सम्मेलन के दौरान हवा में कुछ चीजों के उड़ने पर पाबंदी लगाई गई है। जिसमें पैरा ग्लाइडर, गर्म हवा के गुब्बारे, माइक्रोलाइट विमान और यूएवी के उड़ने की इजाजत नहीं होगी। साथ ही करीब 207 ट्रेनों और दिल्ली के आसपास लगने वाले क्षेत्रों की बसों के आवागमन को रद्द किया गया है। भारत सरकार की कोशिश इस सम्मेलन के जरिए देश की ताकत से दुनिया को रूबरू कराने की हैं, क्योंकि दुनिया भर से कई विदेशी मेहमान इस सम्मेलन में शामिल होने दिल्ली पहुंच रहे हैं।
G-20 शिखर सम्मेलन के चलते हाई अलर्ट पर रहेगी दिल्ली
G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान पूरी दिल्ली हाई अलर्ट पर रहेगी। सुरक्षा के तौर पर करीब 1 लाख 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। वर्ल्ड क्लास सम्मेलन को लेकर गृह मंत्रालय की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस मुख्य रूप से प्रमुख नोडल एजेंसी है, लेकिन सभी अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी सुरक्षा में तैनात किया गया है। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के रक्षकों की पचास टीमें तैयार की गई हैं। जिसमें लगभग 1000 जवान शामिल होंगे। इसके अलावा 300 बुलेटप्रुफ वाहनों को भी तैयार किया जा रहा है।

यह प्लान भी तैयार
दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होने वाले में शामिल होने G-20 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल लीडर आ रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार किसी भी तरह की चूक नहीं होने देना चाहती है, जिसके लिए तैयारियां के तौर पर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर जिन मार्ग से विदेशी मेहमानों के जहाज फ्लाई करेंगे, उसके साथ वायुसेना के लड़ाकू विमान भी उड़ान भर सकते हैं। इस काम के लिए मिराज 2000, राफेल और सुखोई 30 जैसे खतरनाक मिसाइल को तैयार रखा गया है। अगर दुश्मन हमला करने की कोशिश करते हैं तो उसे हवा में ही जवाब देने की क्षमता रखने वाले विमान को इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर एक्शन मोड़ में रखा गया है।