जिला हिसार के गांव अग्रोहा को विश्व के नक्शे पर लाने और विश्व का नंबर एक पर्यटन केंद्र बनाने की पहल केंद्र सरकार द्वारा की गई है। इस कड़ी के पहले चरण में अब एएसआई और हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग संयुक्त रूप से अग्रोहा पुरातत्व स्थल की खुदाई कार्य शुरू करने जा रहा है। राखीगढ़ी की तर्ज पर जल्द ही सरकार ऐतिहासिक स्थल अग्रोहा को विकसित करने जा रही है।
बता दें कि अग्रोहा के पुरातात्विक स्थल को महाराजा अग्रसेन की राजधानी माना जाता है। इस स्थल के विकसित होने से न केवल आस्था का केंद्र विश्व में अपनी पहचान बनाएगा, बल्कि यह स्थल पर्यटन के रूप में भी विख्यात होगा। केंद्र सरकार ने अग्रोहा पुरातात्विक स्थल एवं निकटवर्ती क्षेत्र का समग्र विकास राखीगढ़ी मॉडल के अनुसार एमओयू के माध्यम से करने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में भारत सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अन्वेषण एवं उत्खनन अनुभाग के निदेशक (अन्वेषण एवं उत्खनन) प्रवीण कुमार मिश्रा ने पत्र लिखकर जानकारी दी है। उन्होंने हरियाणा सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक को लिखे पत्र में बताया कि अग्रोहा पुरातत्व स्थल की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा-द्वितीय और हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।
अग्रसेन काल की आज तक दबी हुई सभ्यता
खुदाई शुरू करने से पहले, संभावित क्षेत्रों में जीआरपी सर्वेक्षण जैसे अन्य सर्वेक्षण किए जाएंगे, अग्रोहा ऐतिहासिक नगरी है। हड़प्पा से पहले की सभ्यताएं रहती थीं और यहां से इतिहास का बहुत कुछ मिल सकेगा। महाराजा अग्रसेन की राजधानी रही अग्रोहा में महाराजा अग्रसेन काल की सभ्यता आज तक दबी हुई है, जिसको खुदाई कर दुनिया के सामने लाया जा सकेगा।
1939-1979 में भी हो चुकी खुदाई
भारत में ब्रिटिश शासनकाल में एक रोबोट्स नाम के वैज्ञानिक हुए, जिन्होंने यहां केवल 15 दिन का पुरातत्व सर्वे किया था। सन 1926 में अंग्रेज सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए अग्रोहा और उसके आसपास के क्षेत्र को संरक्षित घोषित कर दिया था। उसके बाद सन 1939 और 1979 में दो बार खुदाई की गई। 1979 में की खुदाई में प्राचीन सभ्यता के प्रमाण मिल चुके हैं। अब फिर से अग्रोहा को विकसित करने की उम्मीद जगी है।