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Mahakumbh 2025: आस्था, अध्यात्म और आधुनिकता का दिखेगा “संगम”, 12 साल में बदली “तस्वीर”! जानें इस बार क्यों है खास?

देश उत्तर प्रदेश

Prayagraj महाकुंभ, जो भारतीय संस्कृति और आस्था का सबसे बड़ा पर्व है, 12 सालों के अंतराल के बाद फिर से सज रहा है। 2025 में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उत्तर प्रदेश में उमड़ने जा रही है, बल्कि इस बार आस्था, अध्यात्म और आधुनिकता का अद्भुत संगम भी दिखेगा। पिछले महाकुंभ से लेकर अब तक,  इस महापर्व की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां एक ओर श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर इस बार की व्यवस्थाएं और सुरक्षा के मानक भी नए आयाम छू रहे हैं। आइए, जानते हैं कि कैसे महाकुंभ 2025 में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत मिलन देखने को मिलेगा।

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144 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

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144 साल बाद बन रहे दुर्लभ खगोलीय संयोग के बीच प्रयागराज में इस बार महाकुंभ केवल आस्था, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और आधुनिक प्रबंधन का एक अद्भुत उदाहरण पेश करेगा। ऐसे में इसका महत्व और बढ़ गया है। इस बार महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा से होगी। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का शाही स्नान (अमृत स्नान) होगा, जबकि 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान होगा। अनुमान है कि मौनी अमावस्या पर करीब 6-8 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान करेंगे। इसके बाद 3, 12, और 26 फरवरी को मुख्य स्नान पर्व आयोजित होंगे।

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महाकुंभ 2025: कई पहलुओं में दिखेगा बदलावों का स्वरूप

40 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान: पिछले महाकुंभ (वर्ष 2013) में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु शामिल हुए थे, जबकि इस बार अनुमान है कि लगभग 40 करोड़ लोग आएंगे। इससे यह पर्व और भी भव्य और विविधता से भरपूर होगा। सरकार द्वारा की गई तैयारियों और सुविधाओं के मद्देनजर अधिकारियों का मानना है कि इस बार महाकुंभ एक अद्भुत अनुभव होगा, जो न केवल आस्था का प्रतीकोगा बल्कि लोगों को एक साथ लाने वाला भी बनेगा।

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40 वर्ग किलोमीटर में फैला भव्य मेला, तैयारियां जोरों पर

इस बार का मेला अपने विशाल आकार और भव्यता के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। 2013 में आयोजित महाकुंभ की तुलना में, इस बार मेला क्षेत्रफल को बढ़ाकर 40 वर्ग किलोमीटर किया गया है, जो कि पिछले महाकुंभ के 16 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल से तीन गुना ज्यादा है। इस विशालकाय मेले में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रशासन ने इस बार पूरी तैयारी की है ताकि 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा सके।

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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 25 सेक्टरों में बांटा महाकुंभ क्षेत्र

महाकुंभ 2025 के आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस महाकुंभ में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूरे मेले को 25 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर में पुलिस थाने और चौकियों की संख्या को बढ़ाया गया है, जिसमें 56 पुलिस थाने और 144 चौकियों की स्थापना की गई है। इस बार 18,479 नागरिक पुलिसकर्मी, 1,378 महिला पुलिसकर्मी और 1,158 सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। CCTV कैमरे, ड्रोन निगरानी और मेटल डिटेक्टरों के माध्यम से मेले की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। साथ ही, अराजकता या किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस, होम गार्ड्स और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है।

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5060 करोड़ का बजट, पिछले महाकुंभ से तीन गुना ज्यादा

राज्य सरकार ने इस बार के आयोजन के लिए 5060 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की है। यह बजट 2013 के महाकुंभ में निर्धारित 1214 करोड़ रुपये के बजट की तुलना में लगभग 4043 करोड़ रुपये अधिक है, जो कि पिछले महाकुंभ के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा है। इस बार का बजट महाकुंभ के भव्यता और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। इस बार 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, जिसके चलते प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है, ताकि हर श्रद्धालु को उचित सेवाएं मिल सकें। महाकुंभ 2025 का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि यह विकास, सुरक्षा और सुविधाओं का एक अनूठा उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

परिवहन की व्यापक सुविधाएं, 550 शटल बसें रहेंगी उपलब्ध

महाकुंभ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक परिवहन व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। राज्य सरकार ने इस बार 550 शटल बसों का संचालन करने का निर्णय लिया है, जो महाकुंभ स्थल और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच निरंतर सेवा प्रदान करेंगी। इस बार की महाकुंभ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 40 करोड़ से अधिक होने की संभावना है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने विशेष तैयारी की है। शटल बसें श्रद्धालुओं को मुख्य स्नान पर्व के दौरान और सामान्य दिनों में आरामदायक और सुरक्षित यात्रा की सुविधा प्रदान करेंगी। शटल बसें सामान्य दिनों में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक और मुख्य स्नान पर्वों पर 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी।

देशभर से चलेंगी विशेष ट्रेनें, श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा

महाकुंभ के आयोजन के मद्देनजर भारतीय रेलवे ने श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए तैयारियां की हैं। विभिन्न शहरों से प्रयागराज के लिए कई विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेलवे द्वारा जारी की गई नई समय सारणी के अनुसार, दिल्ली, पटना, पुणे, मुंबई, सिकंदराबाद, कोयंबटूर और अन्य शहरों के लिए नियमित रूप से विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इनमें पटना-आनंद विहार, मुजफ्फरपुर-सिकंदराबाद, और गया-कोयंबटूर जैसी ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। ये ट्रेनें श्रद्धालुओं को महाकुंभ स्थल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

ठहरने की किफायती सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध

प्रयागराज में ठहरने की व्यवस्था को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। शहर में 100 से ज्यादा होटल उपलब्ध हैं, जिनमें लगभग 2,000 कमरे श्रद्धालुओं के लिए बुकिंग के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही, स्थानीय पर्यटन विभाग ने होम स्टे का रजिस्ट्रेशन भी किया है, जिसमें श्रद्धालु पेइंग गेस्ट की तरह रुक सकेंगे। ये होम स्टे दो से पांच कमरों वाले हैं, जिससे श्रद्धालु छोटे और आरामदायक आवास का विकल्प चुन सकते हैं। महाकुंभ के दौरान ठहरने की सभी सुविधाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। पर्यटन विभाग अपनी वेबसाइट और महाकुंभ मेले की वेबसाइट पर होम स्टे की पूरी जानकारी अपडेट करेगा, ताकि श्रद्धालु आसानी से अपनी पसंद के अनुसार बुकिंग कर सकें।