Delhi नरसिम्हा राव के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने मनमोहन सिंह के पास जाकर कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि वह वित्त मंत्री बनें। मनमोहन ने इसे हल्के में लिया और सोचा कि यह महज एक औपचारिकता है। लेकिन अगले दिन, नरसिम्हा राव स्वयं मनमोहन के पास आए और गुस्से में कहा कि उन्हें राष्ट्रपति भवन जाकर शपथ लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस प्रकार, मनमोहन सिंह ने 21 जून 1991 को वित्त मंत्री के पद पर शपथ ली और वह देश के 22वें वित्त मंत्री बने।

मनमोहन सिंह ने राव सरकार में 16 मई 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद, उन्होंने 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के तौर पर दो कार्यकाल बिताए, जो उनके राजनीतिक करियर की एक महत्वपूर्ण अवधि थी।
उनकी आर्थिक नीतियों और सुधारों ने देश के आर्थिक परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मनमोहन सिंह की कहानी न केवल उनकी काबिलियत का परिचायक है, बल्कि यह दिखाती है कि राजनीति में एंट्री अक्सर अप्रत्याशित तरीकों से हो सकती है।







