प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) ने 600 से अधिक वरिष्ठ वकीलों द्वारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया(CJI) डीवी चंद्रचूड़ को भेजे गए पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि डराना और धमकाना किसी को नहीं सिखाया जाता है और यह कांग्रेस की पुरानी संस्कृति है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्र के हित में प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की प्रतिबद्धता से बचेगी। वे भारतीय लोगों के आसपास उनके समर्थन का विस्तार देख रहे हैं। इस पत्र को लिखने वाले वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि न्यायपालिका को राजनीतिक और व्यावसायिक दबावों से बचाना होगा। उन्होंने बताया कि न्यायिक अखंडता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अदालतों की गरिमा पर धारा डाली जा रही है।

यह पत्र साल्वे के साथ कई अन्य प्रमुख वकीलों द्वारा लिखा गया था, जिनमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा, अदिश अग्रवाल, चेतन मित्तल, पिंकी आनंद, हितेश जैन, उज्ज्वला पवार, उदय होल्ला और स्वरूपमा चतुर्वेदी शामिल हैं।
पहचान और विश्वास को खतरे में डाल रही
वकीलों ने लिखा कि न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है, जो उसकी पहचान और विश्वास को खतरे में डाल रही है। वे कहते हैं कि राजनीतिक मामलों में अदालतों को बदनाम करने के लिए घिसे-पिटे राजनीतिक एजेंडे के तहत उथले आरोप लगाए जा रहे हैं।

इसे मानते है बेंच फिक्सिंग की थ्योरी
वकीलों का कहना है कि कुछ लोग दिन में किसी राजनेता का केस लड़ते हैं और रात में मीडिया में उनकी तारीफ करते हैं, ताकि फैसले को प्रभावित किया जा सके। वे इसे बेंच फिक्सिंग की थ्योरी भी मानते हैं। इसके अलावा न्यायाधीशों पर भी हमले किए जा रहे हैं और उनके बारे में झूठी बातें फैलाई जा रही हैं। इससे न्यायपालिका की गरिमा पर धारा डाली जा रही है।


