➤कुलगाम में ऑपरेशन अखल का 9वां दिन
➤2 सैनिक शहीद, कई घायल
➤हाई-टेक हथियार और कमांडो तैनात
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के घने और दुर्गम अखल जंगलों में आतंकियों के खिलाफ शुरू हुआ ‘ऑपरेशन अखल’ अब लगातार नौवें दिन भी जारी है। यह इस साल का सबसे लंबा चलने वाला एनकाउंटर साबित हो रहा है, जिसमें सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपने के तरीके और इलाके की कठिन भौगोलिक स्थिति से दोहरी चुनौती झेलनी पड़ रही है।
शनिवार को मुठभेड़ के दौरान सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीतपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह ने बहादुरी से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इनकी शहादत के साथ पूरे इलाके में गम और आक्रोश का माहौल है। इनके अलावा अब तक कुल 6 से 11 सुरक्षाकर्मी घायल हो चुके हैं, जिनमें से कुछ का अस्पताल में इलाज चल रहा है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि घायलों की हालत स्थिर है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।
ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई
1 अगस्त 2025 को खुफिया एजेंसियों ने इनपुट दिया कि अखल के घने जंगलों में भारी हथियारों से लैस आतंकियों का एक ग्रुप छिपा हुआ है। इस सूचना के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से इलाके को घेर लिया। शुरूआती दो दिनों में हल्की झड़पें हुईं, लेकिन तीसरे दिन से गोलीबारी तेज हो गई। आतंकियों ने घने जंगलों और पहाड़ी दर्रों का फायदा उठाकर कई बार पोजीशन बदल ली, जिससे ऑपरेशन लंबा खिंच गया।
हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल
आतंकियों को पकड़ने और खत्म करने के लिए सेना ने इस बार बड़े पैमाने पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। इलाके में ड्रोन और यूएवी से निगरानी की जा रही है, हेलीकॉप्टर से हवाई सपोर्ट दिया जा रहा है और पैरा कमांडो को जमीन पर तैनात किया गया है। सुरक्षाबल लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, साथ ही विस्फोटकों से आतंकियों के संभावित ठिकानों को ध्वस्त किया जा रहा है।
आतंकियों की संख्या और मारे जाने की स्थिति
अब तक की जानकारी के अनुसार कम से कम एक आतंकी मारा जा चुका है, जबकि कुछ रिपोर्टें दो आतंकियों के मारे जाने की बात कह रही हैं। उनके संगठन का नाम अभी तक आधिकारिक रूप से उजागर नहीं हुआ है, लेकिन सुरक्षाबलों को शक है कि वे पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए प्रशिक्षित आतंकवादी हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी
ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए सेना के उत्तरी कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा और जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी नलिन प्रभात खुद हालात की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। इलाके में इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बंद कर दी गई हैं ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
स्थानीय माहौल
गांव के लोग सुरक्षा कारणों से अपने घरों में हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। सेना ने ग्रामीणों से सहयोग बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक इलाके को पूरी तरह से आतंकियों से मुक्त नहीं कर दिया जाता।

