रोहतक जिला परिषद की चेयरपर्सन Manju Hooda पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है। महिला पार्षद के बेटे के अपहरण केस में मंजू हुड्डा और उनके पति राजेश सरकारी पर मामला दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसके साथ ही 23 अक्टूबर को उनके खिलाफ जिला पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, जिससे उनकी कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
जिला पार्षद नीलम के बेटे धैर्य (15) का 21 अक्टूबर को अपहरण हुआ था। धैर्य के पिता जगबीर खत्री ने आरोप लगाया कि मंजू हुड्डा और उनके पति राजेश सरकारी ने इस किडनैपिंग की साजिश रची थी ताकि वे 23 अक्टूबर को आने वाले अविश्वास प्रस्ताव को प्रभावित कर सकें। धैर्य के अनुसार, अपहरणकर्ता उसे धमकाते हुए बोले कि “अपने पापा को समझा ले, नहीं तो इलेक्शन के बाद देख लेंगे।”
मंजू हुड्डा और राजेश सरकारी का बचाव
मंजू हुड्डा और उनके पति राजेश सरकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश बताया। मंजू हुड्डा ने वीडियो जारी कर कहा, “मुझे इस अपहरण से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने हाल ही में शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव लड़ा है, और मैं लोकतंत्र में विश्वास करती हूं। यह सब झूठी बातें हैं।”
राजेश सरकारी ने भी इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया और कहा कि यह उन्हें बदनाम करने और उनके कामकाज को प्रभावित करने की साजिश है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
रोहतक बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अरविंद श्योराण ने कहा कि अपहरण मामले में जिन धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है, वे गैर-जमानती हैं। इससे पुलिस के लिए गिरफ्तारी का रास्ता खुलता है। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
राजनीतिक संकट: अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
इस मामले के अलावा, मंजू हुड्डा के खिलाफ 23 अक्टूबर को जिला पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। अगर प्रस्ताव पारित होता है, तो मंजू हुड्डा अपनी चेयरपर्सन की कुर्सी खो सकती हैं।