हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी अपने चरम पर है। गुटबाजी का आलम यह है कि दोनों गुट एक दूसरे को देखते तक का तैयार नहीं है। एक गुट यदि कोई कदम उठाया, तो दूसरा इसका तुरंत ही विरोध कर देता है। गुटबाजी को लेकर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी ज्यादा असरकारक साबित नहीं हो पा रहा था।
अब लगता है, कांग्रेस आला कमान ने हरियाणा में पार्टी की गुटबाजी को दूर करने के लिए पहल करनी शुरू कर दी है। इसके लिए सोमवार को दोनो गुटों समेत पार्टी के करीब 32 नेताओं को दिल्ली बुलाया है। इसमें हरियाणा मामलों के प्रभारी दीपक बाबरिया, कुमारी शैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कैप्टन अजय यादव, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश अध्यक्ष उदयभान शामिल है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कुछ ऐेसे नेता भी है, जिन्हें आला कमान से भी मीटिंग के लिए फोन आया है।
राहुल गांधी विवाद की वजह जानने का करेंगे प्रयास
सोमवार को तीन बजे की बैठक में पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से बातचीत कर उनके बीच विवाद की वजह जानने की कोशिश करेंगे। यह बैठक इसलिए भी अहम हो जाती है, क्योंकि पिछले ही दिनों कांग्रेस के सीनियर नेता व राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुमारी शैलजा व किरण चौधरी एक मंच पर आ गए हैं। तीनों नेता पहले अलग अलग गुट में बंटे थे, इस वजह से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक तरह से पार्टी के भीतर अपना एकाधिकार सा बना चुके थे।
यहां तक कि पार्टी आलाकमान भी उन्हें ही तवज्जो दे रहा था, लेकिन तीनों नेताओं के एक मंच पर आने से अब वह हुड्डा को काउंटर करने की स्थिति में आ गए हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर अब एक तरह से संतुलन की स्थिति बनती जा रही है।
अब हुड्डा का दबाव केंद्रीय आलाकमान पर कम हुआ
हरियाणा की राजनीति के विशेषज्ञ, लेखक व दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर रामजीलाल का मानना है कि किरण चौधरी, रणदीप सिंह व शैलजा के एक मंच पर आने से अब हुड्डा का दबाव केंद्रीय आलाकमान पर कम हुआ है। इसलिए अब आलाकमान कोई कड़ा संदेश भी हुड्डा खेमे को देने की स्थिति में है। यह ठीक ठीक वैसी ही स्थिति है, जैसी कि राजस्थान में थी। इसमें भी राहुल गांधी ने सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत के बीच के गतिरोध को दूर करने में सफलता हासिल की है। इसी तर्ज पर हरियाणा में भी पहले हो सकती है।
गुटबाजी ने सारा खेल बिगाड़ दिया
डॉक्टर रामजी लाल का यह भी मानना है कि हुड्डा जहां रोहतक, सोनीपत के क्षेत्र में मजबूत है, वही यह तिकड़ी इससे ज्यादा जिलों में अपनी पकड़ रखती है। इनके साथ कैप्टन अजय यादव यदि आ जाते हैं, जैसा कि संभावना है भी, तो एनसीआर में भी इस गुट की मजबूती काफी बढ़ सकती है। इस तथ्य को पार्टी आलाकमान भी समझ गया है। कांग्रेस के रणनीतिकार यह भी समझ गए कि पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी सरकार बन सकती थी, लेकिन गुटबाजी ने सारा खेल बिगाड़ दिया। इस बार पार्टी यह मान कर चल रही है कि वह सरकार बना सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में पार्टी की सीनियर लीडरशिप नहीं है।
दोनो गुट एक दूसरे को तारपीडो करने की कोशिश में
एक ओर जहां पार्टी लीडरशिप हरियाणा को लेकर बेहद गंभीर है, इधर प्रदेश में स्थिति यह है कि दोनो गुट एक दूसरे को तारपीडो करने की कोशिश में लगे रहते हैं। सीइटी को लेकर करनाल में तिकड़ी का विरोध प्रदर्शन था, तब उनके प्रदर्शन को मीडिया कवरेज से रोकने की कोशिश हुई। कई मेन स्ट्रीम मीडिया ने सीइटी के प्रदर्शन को अंडरप्ले भी किया।
नेता एक दूसरे के लिए विपक्ष का काम कर रहे
हरियाणा की राजनीति पर शोध कर रहे अश्वनी चौहान ने बताया कि हरियाणा में कांग्रेस कोई बड़ा मुद्दा खड़ा नहीं कर पा रही है। इसकी सीधी वजह यह है कि पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। लगता तो यह है कि कांग्रेस सरकार के लिए विपक्ष न होकर इसके नेता एक दूसरे के लिए विपक्ष का काम कर रहे हैं। ऐसे दौर में यह मीटिंग काफी अहम हो जाती है।
क्या राहुल गांधी कांग्रेस की गुटबाजी को कर पाएंगे दूर
अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी को दूर कर पाते हैं, क्योंकि अभी तक तो प्रदेश में पार्टी का संगठन तक नहीं बन पा रहा है। जबकि अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। क्या दिल्ली की बैठक में पार्टी के संगठन को लेकर आम राय बन पाएगी। यह देखना भी दिलचस्प होगा, इसलिए हरियाणा की राजनीति के लिहाज से यह मीटिंग काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।