● एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में परम पूज्य राष्ट्र संत स्वामी श्री गोविंददेव गिरी जी महाराज का आगमन और आशीर्वचन
● स्वामी जी ने शिक्षा, सनातन धर्म और समाज में संतुलन पर प्रकाश डाला, विद्यार्थियों के सवालों के उत्तर दिए
● संस्कारयुक्त आधुनिक शिक्षा और समाज के प्रति कर्तव्य निभाने का संदेश दिया
Swami Govinddev Giri Ji: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में परम पूज्य राष्ट्र संत स्वामी श्री गोविंददेव गिरी जी महाराज का शुभागमन हुआ। इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण में उपस्थित सभी छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण भाव-विभोर हो गए। स्वामी श्री गोविंददेव गिरी जी महाराज वर्तमान में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के कोषाध्यक्ष हैं। 22 जनवरी 2024 को जब श्री राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह हुआ था, तब करोड़ों लोगों ने उन्हें सुना था।

स्वामी जी के कॉलेज आगमन पर एसडी एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान अनूप कुमार, सचिव नरेश गोयल, कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘श्री राम’ के उद्घोष और दीप प्रज्वलन से हुई। स्वामी जी ने कॉलेज परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया।

धर्म, शिक्षा और समाज पर स्वामी जी के विचार
स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज ने कहा कि ईश्वर, समाज, प्रकृति और परिवार के बीच संतुलन ही धर्म का असली स्वरूप है। उन्होंने बताया कि संस्कारयुक्त आधुनिक शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। विद्यार्थी केवल व्यवसाय के लिए न पढ़ें, बल्कि अपने जीवन और समाज के सुधार के लिए शिक्षा प्राप्त करें। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी जाति या धर्म विशेष का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए है। भगवान राम का नाम लेने से मनुष्य के पाप कम होते हैं, जबकि जो उनका स्मरण नहीं करता, उसके सिर पर पापों का बोझ बना रहता है।
निकिता का प्रश्न – मां-बाप बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाकर रखते हैं – हम इस दबाव से कैसे निपटे? मां-बाप को कौन समझाएगा?
स्वामी जी- शिक्षण संस्थानों को चाहिए की इस विषय पर वे बच्चों के अभिभावकों से संवाद करे । बच्चों को भी चाहिए कि वे अपनी क्षमता अनुसार ही प्रयास करें और अपनी जान को झोखिम में न डाले । जीवन प्रबंधन को अपनी लाइफ में अपनाना चाहिए ।
महक का प्रश्न – आप राम-मंदिर के निर्माण से जुड़े हुए हैं| वो कार्य संपन्न हुआ, उस समय आपके मन के भाव हमसे शेयर करें?
स्वामी जी – मन में आनंद और गर्व की अलौकिक सी प्रसन्नता थी और आज भी यह अपरिकल्प्नीय भाव ज्यौं का त्यौं मन में है ।
साक्षी का प्रश्न – आज का युवा विदेश भाग रहा है – यह सोचकर कि वहां सब अच्छा – सब आतुर है जाने को – आप युवा का मार्गदर्शन करें?
स्वामी जी – युवा को ये समझना चाहिए होगा कि जिस वैभैव और ऐश्वर्य की चाह में वे विदेश जा रहे है वह केवल मात्र दिखावा है । वास्तव में उन्हें दिन दोगुनी रात चौगुनी मेहनत करनी पड़ती है । फिर भी भारत जैसा मान उनको वहां नहीं मिल पाता है ।
आर्य का प्रश्न – युवा नशे की लत में लिप्त है – इसका नियंत्रण किस प्रकार करें?
स्वामी जी – दो तरीके है, पहला मन मजबूत रखे, नशे से बचे परन्तु यदि फिर भी लत लग जाए तो किसी चिकित्सक की मदद ले ।
केशव का प्रश्न – मोबाइल फोन, सोशल मीडिया युवा में इतना अधिक चलन है – हमें पता भी है परंतु रोक नहीं पाते, क्या करें?
स्वामी जी – इसके लिए ई-फास्टिंग (ई व्रत) करनी चाहिए । प्रत्येक दिन आधा या एक घंटा मोबाइल से दूर रहने का प्रयास करे । इसे अपना अध्यापक बनाये और इसकी मदद अपनी पढ़ाई में ले । इसका सदुपयोग करें ।
अनूप का प्रश्न – हमारी पीढ़ी पर पियर प्रेशर का अत्यंत अनदेखा प्रभाव है – इससे हम युवा गलत भी कर रहे हैं कैसे निपटें?
स्वामी जी – बुरे दोस्तों को हमें तुरंत प्रभाव से त्यागना चाहिए और अपने बड़ों से मार्गदर्शन लेना चाहिए ।
शिवराम का प्रश्न – आपको संन्यास की प्रेरणा कहां से प्राप्त हुई?
स्वामी जी – परिवार में आठ पीढ़ियों से गीता पठन की परंपरा है । फिर मैं संतों के भी सानिध्य में रहा । फिर अपने गुरु के निर्देशों पर दीक्षा ली ।
नीलाक्षी का प्रश्न – हमेशा सुना और पढ़ा कि फल की इच्छा मत करो, कर्म करते जाओ परंतु मानव मन फल की इच्छा के बिना कर्म कैसे कर सकता है?
स्वामी जी – ये बात केवल संयाई संतों के लिए है । युवाओं को लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने के लिए कर्म करने चाहिए ।
वर्षा का प्रश्न – अगर भाग्य तय है तो हम मेहनत क्यों करें?
स्वामी जी – भाग्य का सहारा केवल दुर्बल, निर्बल और नपुंसक लोग लेते है । भाग्य को स्वीकार करते हुए मेहनत के साथ निरंतर कर्म करते रहे ।
चिराग का प्रश्न – क्या पिछले जन्मों के कर्मों का फल हमें इस जन्म में भुगतना पड़ता है? और क्यों भुगतना पड़ता है?
स्वामी जी – कोई भी कर्म हो – फल तो मिलना एवं भुगतना निश्चित है । कब, कैसे, किस रूप में ये होगा ये नियति तय करती है । पर क्रिया की प्रतिक्रिया तो होती ही है ।
विश्वा का प्रश्न – फोकस कैसे करें? बहुत लोभ है जो भटकाते हैं मन को? टिकाव कैसे आएगा, प्रकाश डालें?
स्वामी जी – मन पर नियंत्रण रखे, मोबाईल का सीमित इस्तेमाल करें, छात्र पढ़कर लिखने का अभ्यास करें ।

स्वामी गोविंददेव गिरी जी ने कहा कि युवा आधुनिक शिक्षा अवश्य प्राप्त करें, लेकिन अपने संस्कारों और धर्म से जुड़े रहें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने देश, समाज और माता-पिता के प्रति कृतज्ञ रहें। उन्होंने यह भी बताया कि श्री राम मंदिर के निर्माण में कई कठिनाइयाँ आईं, लेकिन अंततः सरकार और विशेषज्ञों की सहायता से भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो सका।

कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि स्वामी जी का आगमन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। उन्होंने सभी को संस्कारयुक्त शिक्षा और समाज सेवा के महत्व को आत्मसात करने का आह्वान किया।