हिंदू धर्म के अनुसार संतोषी माता को धन कि देवी माना जाता है, जानिए माता के व्रत का क्या है चमत्कार

धर्म

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी के साथ मां संतोषी की पूजा करने का विधान है। मां संतोषी को सुख-शांति और वैभव का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत रखकर उनकी विधिवत पूजा करता है। उसकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

इसके साथ ही धन और विवाह संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है। संतोषी माता का व्रत करने के कोई कठोर नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। जानिए किस विधि से करें मां संतोषी की पूजा, साथ ही जानिए संतोषी माता की आरती।

व्रत करने से दूर होते हैं सारे दुख

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संतोषी माता का व्रत करने से हर दुख दूर होते है। शुक्रवार के दिन माता संतोषी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ रखना चाहिए। माँ संतोषी को सुख-शांति और वैभव का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत रखता है, उनकी श्रद्धा के साथ पूजा करता है। उसकी हर इच्छा पूरी हो जाती है। इसके साथ ही धन से संबंधी और विवाह संबंधी समस्याओं का हल मिल जाता है। संतोषी माँ का व्रत करना कठिन नही है।

सुख-शांति और समृद्धि के लिए करें 16 शुक्रवार

जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए 16 शुक्रवार तक श्रद्धा भाव से मां संतोषी का व्रत करते हैं। मां संतोषी उनके घर में धन की कमी दूर करेगी और खुशहाल जिंदगी कर देगी।जो व्यक्ति व्रत को पूरी श्रद्धा से पूर्ण करता है तो माता उनकी सारी समस्‍याएं दूर कर देती हैं।

हिंदू धर्म के अनुसार, माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं। माना जाता है कि माता संतोषी की पूजा करने से जीवन में खुशी का भाव होता है। माता संतोषी की पूजा करने से धन और विवाह संबंधी सभी परेशानिया भी दूर हो जाती है। संतोषी मां का व्रत कई नियमो के साथ रखना चाहिए।

किस दिन से करना चाहिए माँ का व्रत

हिंदू धर्म के लोग माता संताषी को सुख, शांति और वैभव का प्रतीक मानते है। मां संताषी का व्रत शुक्रवार की शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है। आपको बता दे कि किसी भी व्रत को पितृ पक्ष में नहीं रखना चाहिए। यदि आपने पहले से व्रत रखा हैं तो पितृ पक्ष में व्रत रखने से कोई बूरा प्रभाव नही होगा।

व्रत की विधि

शुक्रवार के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठकर सभी कामों को पूरा करना चाहिए उसके बाद स्नान आदि करना चाहिए। मां संतोषी की पूजा मन के साथ करनी चाहिए। इसके बाद एक स्वच्छ जगह या फिर पूजा घर में एक चौकी में लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए।कलश स्थापना करें, और उसके बाद विधी पूर्वक माता संतोषी की पूजा करें।माता संतोषी को फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि अर्पित करें। प्रसाद में मां को भिगोए हुए चने,दाल और गुड़, केला आदि के साथ पूजा करे।

मां संतोषी जी की आरती

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।जय संतोषी माता….
सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हो।
जय संतोषी माता….
गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे।मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन जन मोहे। जय संतोषी माता….
स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे।धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे।
जय संतोषी माता….
गुड़ अरु चना परम प्रिय ता में संतोष कियो।संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो।जय संतोषी माता….
शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।भक्त मंडली छाई कथा सुनत मोही। जय संतोषी माता….
मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई।जय संतोषी माता….
भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै।
जय संतोषी माता….
दुखी दारिद्री रोगी संकट मुक्त किए।बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिए।जय संतोषी माता….
ध्यान धरे जो तेरा वांछित फल पायो।पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो।जय संतोषी माता….
चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे।संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे।
जय संतोषी माता….
संतोषी माता की आरती जो कोई जन गावे।रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे।जय संतोषी माता….