इस्कॉन कुरुक्षेत्र व इस्कॉन प्रचार समिति(ISKCON Prachar Samiti) पानीपत के संयुक्त तत्वाधान में ऐतिहासिक नगरी पानीपत में श्रीमद् भागवत कथा(Shrimad Bhagwat Katha) व भगवान श्री कृष्ण बलराम रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। प्रातः कालीन सत्र में एक प्रभात फेरी(Prabhatferi) का आयोजन किया गया, जो कि हरि(Hari) नाम का संकीर्तन(Sankirtan) करते हुए स्थानीय मॉडल टाउन अशोक गोयल के निवास स्थान से शुरू होकर मुकेश गोयल बांके बिहारी एंटरप्राइजेज के निवास स्थान पर भव्य प्रसाद के साथ समाप्त हुई।
प्रभातफेरी में इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास(Sakshi Gopal Das) ने श्रीमद भगवत कथा सुनने के लिए एवं श्री कृष्ण भक्ति के लिए स्थानीय लोगों को प्रेरित किया और प्रभात फेरी में हरे कृष्ण महामंत्र का गुणगान करती हुई कृष्ण भक्तों की टोली भक्ति में झूमती व नित्य करती हुई स्थानीय लोगों को भगवान श्री कृष्ण बलराम रथयात्रा व श्रीमद भागवत कथा सुनने के लिए एवं श्री कृष्ण भक्ति के लिए प्रेरित कर रही थी। वहीं आज दोपहर में एक प्रेस कांफ्रेंस का भी आयोजन किया गया। जिसमें की साक्षी गोपाल दास व इस्कॉन प्रचार समिति पदाधिकारी ने श्रीमद् भागवत कथा व भगवान श्री कृष्ण बलराम रथयात्रा के बारे में भी बताया। इस अवसर पर इस्कॉन प्रचार समिति के अध्यक्ष सुन्दर लाल चुघ, आशु गुप्ता, अशोक गोयल, विशाल गोयल, आशीष अग्रवाल, अरविंद सिंघल, इंद्रजीत कथूरिया, सनी अग्रवाल, गोपाल चोपड़ा, ठाकुर चोपड़ा, पंकज मेंहदीरत्ता, इत्यादि उपस्थित रहे।

श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास ने कथा व्यास करते हुए बताया कि शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित को प्रमाण देते हुए बताया कि काम्याकुंज नाम के नगर में एक ब्राह्मण रहता था, जिसका नाम था अजामिल एक दिन की बात वह जंगल में गया, भगवान को अर्पित को करने के लिया फूल, फल और हवन करने के लिया, लकड़ी लेने के लिए गया, जब जंगल से वापस लौट रहा था, तो उसने एक वैश्या को एक शुद्र के बाहों में कामरत देखा। जिसको देखकर उसका मन बिगड़ गया, जब वह अपने घर गया तो उसका भगवान की पूजा में मन नहीं लगा और बार बार वही दृश्य उसके आखों के सामने आ रहा था। वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और उसने अपने पूजा को छोड़ दिया और उससे स्थान पर चला गया।

अजामिल ने माता-पिता को निकाला घर से बाहर
वहां जाकर उसने पाया कि वह वो वैश्या नही थी, तो उसने उस वैश्या का पता करा और पता करके उस वैश्या को अपने धन के बलबूते पर अपने घर में नौकरानी के रूप में रख लिया। इसका विरोध उसके माता पिता ने किया कि बेटा हम ब्राह्मण है और ब्राह्मणों को वैश्या को अपने घर में स्थान नही देना चाहिए। इससे हमारा धर्म भ्रष्ट हो जाएगा, लेकिन अजामिल ने अपने माता पिता की बात नहीं मानी और अपने माता पिता को अपने घर से निकाल दिया। अब उसने उस वैश्या के साथ शादी कर लिया तो उसकी पत्नी ने उसका विरोध किया, तो अजामिल ने अपने पत्नी को भी घर से निकल दिया।
अब उसने वैश्या का संग करके अजामिल ने शराब पीना शुरू कर दिया और कुछ समय के बाद मास खाना शुरू कर दिया और जब उसकी पहचान ब्राह्मण की नही रही तो उसने चोरी करना शुरू कर दिया। अनेक प्रकार के पाप करने लगा पूरा जीवन पापमय हो गया उस वैश्या का संग करके उसने नौ पुत्र पैदा किए, एक बार की बात अयोध्या से एक संत महात्मा के टोली श्री धाम वृंदावन के लिए निकली और चलते चलते जब काम्याकुंज गांव में आए तो संध्या होगा और सोचा कि अब आगे कहा जाएंगे, क्योंकि आगे जंगल है, तो आज रात्रि इसी गांव में विश्राम कर लेते है।

अजामिल अब ब्राह्मण नहीं रहा
उस गांव में जाकर के पूछा की इस गांव में कोई ब्राह्मण का घर है क्या, जहां हम जाकर के भोजन और रह सके तो गांव वालो ने बताया कि एक बहुत बड़ा ब्राह्मण है, तो महात्मा ने पूछ उसका नाम क्या है, उसका नाम है, अजामिल गांव वाला ने मजाक करते हुए बताया कि अजामिल नाम का ब्राह्मण रहता है, तो वह संत अजामिल का रास्ता पूछते हुए अजामिल के घर पहुंच गए और उस समाय अजामिल घर पर नहीं था, क्योंकि वो चोरी करने के लिया गया हुआ था। जाके दरवाजा खटखटाया तो उसके वैश्या पत्नी आई तो महात्मा ने पूछा कि यह अजामिल का घर है,
वैश्या ने बताया कि यह अजामिल का घर है, परंतु अजामिल अब ब्राह्मण नही रहा। अब वह ब्राह्मण का कार्य नहीं करता तो यह सुनकर के सारे महात्मा सोच में पड़ गए कि अब कहां जाए तो महात्मा ने पूछा कि बेटी जन्म तो ब्राह्मण कुल में हुआ था, तो बेटी क्या हम महात्मा तुम्हारे इस आंगन में विश्राम कर सकते है। क्या थोड़ा विश्राम करेंगे और सुबह चले जायेंगे तो उसके बाद महात्मा भजन करने लगे ओर जब प्रातःकाल 4 या 5 बजे तो अजलमिल चोरी करके घर आ गया तो अजामिल ने महात्मा को देखकर अजामिल को क्रोध आ गया और डटना शुरू कर दिया।

10वें पुत्र का नाम रखा नारायण
उसकी वैश्या पत्नी भरा आई और उसने कहा कि ये महात्मा मेरी इच्छा से यहां पर ठहरे है। महात्मा अजामिल की दशा को देखकर हैरान हो गए और महात्मा को दया आ गई तो संत महात्मा ने विचार किया कि अगर हम इसें भगवान का नाम जपने के लिए कहा तो ये इतना पापी हो गया है। इसकी जुबान पे भगवान का नाम आएगा नही, तब उन्होंने विचार किया कि अजामिल के घर दसवें पुत्र का जन्म होने वाला है, तो महात्मा संतो ने अजामिल से दक्षिणा मांगी तो अजामिल ने पूछा क्या चाहिए।
दक्षिणा महात्मा ने कहा कि तुम पति पत्नी वादा करो कि तुम अपने दसवें पुत्र का नाम नारायण रखोगे, तो जब दसवें पुत्र का जन्म हुआ तो अजामिल ने पुत्र का नाम नारायण रख लिया तो जब भी अजामिल अपने पुत्र को बुलाता तो वह अपने पुत्र के नाम के रूप में नारायण नारायण पुकार रहा है, तो जब अजामिल 78 साल का हुआ तो अजामिल को लेने के लिए यमराज ने अपने दूत भेज दिए और नारायण उसका पुत्र अजामिल की खटिया के पास लेता हुआ था, तो अजमिल ने यमराज के दूत को देखकर अजामिल डर गया।

अंतिम समय जीवा पर होगा नारायण का नाम
उसने कहा कि ‘नारायण मुझे बचाओ’ जभी चार विष्णु दूत प्रकट हो गए और फिर विष्णु दूतों और यमराज के दूतों के बीच में युद्ध हुआ तो विष्णु दूतों ने यमराज के दूतों को भगा दिया और अजामिल को बचा लिया और शुकदेव गोस्वामी कहते है है महाराज परीक्षित कोई व्यक्ति ध्यान योग को अपनाएं या हट योग को अपनाएं या किसी भी योग को अपनाएं व्यक्ति को मनुष्य योनि का सबसे बड़ा लाभ जब मिलेगा, जब वह मरते समाय भगवान नारायण को याद करेगा, जब अंतिम समय में हमारी जीवा पे भगवान नारायण का नाम होगा । बैकुंठ के प्राप्ति जभी होगी जब व्यक्ति अंतिम समय में भगवान श्री कृष्ण को याद करता है और एक सुंदर भजन गाया की सब होजाय भाव से पार लेकर नाम तेरा गोविंद नाम तेरा कृष्ण नाम तेरा खुल जाय चारों द्वार लेकर नाम तेरा।