जन्माष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्म के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसे कृष्णष्टमी या गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान कृष्ण के अनुयायियों के लिए जन्माष्टमी का त्योहार बहुत महत्व रखता है। यह त्योहार कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। जन्माष्टमी का त्योहार देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में धूम-धाम से मनाया जाता है।
कृष्ण जन्माष्टमी के लिए ऐसी ही तैयारी झज्जर जिले के बहादुरगढ़ शहर के इस्कॉन मंदिर में जोरों- शोरों से चल रही है। यहां भगवान कृष्ण और राधा को नई पोशाक धारण कराने की परंपरा पूरे भाव से मनाई जाएगी। राधा और श्रीकृष्ण की पोशाक कृष्ण की लीलास्थली वृंदावन में तैयार हुई है जिसपर 2 लाख रुपए की राशि खर्च हुई है। वहीं, राधा और श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिए 50 हजार रूपए के जेवर तैयार किए जा रहे हैं।
5 क्विंटल फूलों से सजेगा मंदिर
इस्कॉन मंदिर के प्रवक्ता विक्रम माहेश्वरी ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाने जा रहे हैं और मंदिरों को भी विदेशी फूलों से सजाया जाएगा। इस बार पिछले साल से भी अधिक भक्त दर्शन के लिए आएंगे। वहीं मंदिर में सभी भक्त आ सकें और कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए लाइन का प्रबंध भी किया गया है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन 7 सितंबर को करीब 5 क्विंटल फूलों से मंदिर की सजावट की जाएगी। वहीं, 2 क्विंटल पंचामृत से राधा और श्रीकृष्ण का अभिषेक होगा। इसके साथ ही मंदिर को रंग- बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है।
पूरे दिन चलेगा लंगर
उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा. मंदिर प्रबंधन की ओर से करीब 4 हजार लोगों के भंडारे की व्यवस्था की जाएगी। भंडारे में पूरा दिन लंगर चलेगा और श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके अलावा, 8 सितंबर को मंदिर नंद उत्सव मनाया जाएगा।
सुबह साढ़े 4 बजे मंगल आरती
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह साढ़े 4 बजे मंगल आरती होगी। इसके बाद, अभिषेक का कार्यक्रम रखा गया है और उसके ठीक बाद, सुबह 9 बजे भगवान श्रीकृष्ण और राधा नए पोशाक में नजर आएंगे। पूरे दिन हरी नाम का गुणगान होगा। शाम को मटकी फोड़ने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
मंदिर प्रवक्ता ने बताया कि भगवान की पालकी यात्रा पूरे सेक्टर में निकाली जाएगी। शाम 6 से रात 10 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण का भक्तजन अभिषेक करेंगे। उसके बाद, मंदिर के पुजारी रात 11.30 बजे अभिषेक करेंगे और रात 12 बजे श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे।
पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ी उत्सुकता
इस्कॉन मंदिर के साथ-साथ ओर भी अन्य मंदिरों में कार्यक्रम होंगे। कुछ जगहों पर भव्यता दिखेगी। लड्डू गोपाल को सजाने-संवारने के लिए बाजार में वस्त्र, बांसुरी, पालना, मालाएं और मुकुट आदि सजे हैं। इस दौरान भक्त कहीं पालना ले रहें हैं और कहीं पर रंग-बिरंगी पोशाक पसंद की जा रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को सजाने को लेकर श्रद्धालु काफी उत्सुक हैं।
बता दें कि महिलाओं द्वारा बाल-गोपाल के रूप को निखारने के लिए एक से बढ़कर एक पोशाक पसंद की जा रही है जिसमें लाल, नीली, काली, सुनहरी और चमकदार पोशाक की मांग ज्यादा है। मुकुट, बांसुरी, फूलों व मोतियों की मालाएं, लटकन आदि की खरीददारी भी चल रही है। कान्हा को झुलाने के लिए पालनों की भी खूब मांग हो रही है। वहीं दुकानदारों का कहना है कि रक्षाबंधन पर्व के बाद अब जन्माष्टमी की खरीदारी का सिलसिला और तेज हो गया है।

