पांडवों के समय का ये शिवालय उत्तर का सोमनाथ कहलाता हैं। भोपाल से 32 कि.मी. दूर भोजपुर का शिवालय विश्व के सबसे प्रमुख शिवालयों में से एक हैं। महाभारतकाल के इतिहास को समेटे इस शिवालय की बहुत सारी जनश्रुतियां हैं। जानकारी के अनुसार इसे पांडवो ने माता कुंती की पूजा के लिए एक रात में बनाया था। जोकि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है। वैसे तो शिवलिंग 21.5 फीट का है पर 14 फीट जमीन के अंदर है, जबकि 7.5 फीट जलधारी के ऊपर है।
एक पत्थर से बना है ये शिवलिंग
मंदिर के 19वें मंहत पवन गिरि के अनुसार यह शिवलिंग एक ही चट्टान से बना है। इसमें कोई जोड़ नहीं है। मंदिर का इतिहास 6500 साल पुराना है।
मप्र की राजधानी भोपाल आकर इस मंदिर तक आसानी से पहंचा जा सकता है। भोपाल आने के लिए बस, ट्रेन और प्लेन की सुविधा है। यह मंदिर भोपाल से करीब 30 कि.मी. दूर दक्षिण पुर्व में बतेवा नदी के दाहिने तट पर एक ऊंची चट्टान पर स्थित है। यहां निजी वाहनों से भी आसानी से आया जा सकता है।
मंदिर के कुछ रुचिपूर्ण तथ्य
- मंदिर की 40 फीट ऊंचाई वाले चार स्तम्भ हैं।गर्भग्रह की अधूरी छत इन्ही चार स्तंभों पर टिकी है।
- यहां वर्ष में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है।
- महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिन भोजपुर महोत्सव का भी आयोजन किया जाता हैं।
भोजपुर में एक अधूरा जैन मंदिर भी है। - इस मंदिर में भगवान शांतिनाथ की 6 मीटर ऊंची मूर्ति है।
- इस मंदिर में लगे एक शिलालेख पर राजा भोज का नाम लिखा है।
- इस मंदिर को उत्तर के सोमनाथ के नाम से जाना जाता है।
- भोजपुर शिव मंदिर के बिल्कुल सामने पश्चमी दिशा में एक गुफा है जो कि पार्वती गुफा है जो कि पार्वती गुफा के नाम से जानी जाती है।

