प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय सुनील वर्मा की 25वीं पुण्य तिथि पर एवं मानवकल्याण व जनमानस कल्याण हेतु 11-12 सेक्टर हुड्डा में आयोजित सप्त दिवसीय भागवत कथा के तृतीय दिवस पर प्रसिद्ध कथा वाचक भागवत रसिक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्रीहरि का स्वरूप है। इस कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं, परंतु दुर्लभ मानव प्राणी को यह कथा सहित भी प्राप्त हो जाती है, क्योंकि यदि भगवान किसी से सब्र सर्वाधिक स्नेह करते हैं, तो वह मानव रूपी अपने भक्तों को करते हैं।
मानव जीवन तभी धन्य होता है, जब वह कथा स्मरण का लाभ प्राप्त कर लेता है। सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़कर अपना मानव जीवन जो कि अश्वमेध यज्ञ के समान होता है, उसको व्यर्थ में ही निकाल देता है। कार्यक्रम में सर्व प्रथम दयानन्द सरस्वती महाराज एवं दाऊजी महाराज एवं अरुणदास महराज ने व्यास पूजन किया।

बच्चों को संस्कारवान बनाने हेतु करें श्रीमद भागवत सिमरन
पंडित राधे-राधे महाराज ने भागवत कथा के प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का सिमरन अवश्य करना चाहिए, बच्चों को संस्कारवान यदि बनाना है, तो सत्संग का द्वार जरूर दिखाना पड़ेगा। आज के 21वीं सदी के भारत में हम सब पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण करने में लगे हुए हैं और लगे भी क्यों ना इस भागदौड़ और फास्ट चल रही जिंदगी के अंदर केवल प्रतिस्पर्धा-प्रतियोगिता ही रह गई है। पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि सत्य आचरण का स्वरूप है, भागवत कथा है, आज के इस दौर में हम सब राजा परीक्षित तो नहीं बन सकते, लेकिन जो भागवत कथा से पूर्व राजा परीक्षित ने अपराध किया था, वह अपराध हम जाने अनजाने में नहीं, अपितु इस 21वीं सदी में जानबूझकर कर रहे हैं।
भोग ही मनुष्य को भोग लेता है
राधे-राधे महाराज ने कहा मनुष्य लोगों को नहीं भोगता अपितु भोग ही मनुष्य को भोग लेता है। इस विषय पर सत्य को समझ लेता है, मानो वही ज्ञानी मनुष्य है, वही महात्मा है, वही संत है, वही सन्यासी है, वही भक्त हैं, जो इस सत्य को समझ लेता है। वह कभी भी दुखी नहीं रहता, यद्यपि भगवान द्वारा बनाई गई 84 लाख योनियों में मनुष्य को तो कर्म के बौद्ध के अनुसार आना ही पड़ता है और 84 लाख योनियों को भोगना ही पड़ता है। प्रश्न यह उठता है कि उन 84 लाख योनियों में आपकी योनी के अंदर रहकर समाज के लिए कुछ कर पाए आप कितना जिए समाज में यह महत्वपूर्ण नहीं है, आप कैसे जीए यह समाज के लिए महत्वपूर्ण होता है।

सेवा मार्ग से व्यक्ति अपने पूर्व जन्म के कर्मो को भी कर लेता है शुद्व : दयानंद सरस्वती
दयानंद सरस्वती महाराज ने कहा यदि कोई व्यक्ति सेवा का मार्ग अपनाता है तो उसका यह जन्म तो शुद्ध एवं अच्छा हो ही जाता है अपने पूर्व जन्म के सभी कर्मों को भी व शुद्ध कर लेता है। दयानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम मास अति पुनीत होता है।इस मास में किया गया पुण्य कार्य बड़ा कल्याणपद होता है। जीतना हो सके पुनीत कार्य करते रहना चाहिए। दान करना चाहिए।नाम जप तप करना चाहते है तो पुरुषोत्तम मास से अधिक उत्तम कोई नहीं हो सकता।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर विशाल वर्मा, श्रीराम वर्मा गोपाल कृष्ण सेठी ,प्रधान इंद्रजीत अशोक सालूजा, निरंजन पाराशर, दिलीप गुप्ता, आश्वनि सहगल, प्रधान मुनीश सदाना, पं. बृजेश शास्त्री, अनिल वर्मा, प्रवीण वर्मा, नीना ग्रोवर, सीमा गुप्ता, स्वाति वर्मा, मंजू, अर्चना सोनी, संजय सोनी, दिनेश नायक, सुनील चावला, सुरेश बबेजा, सचिन जताना, वेद बांगा सहित अनेक श्रद्वालु मौजूद रहे।

