द्विपुष्कर योग में सावन माह का आज चौथा मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन औरतें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए, और अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास करती है और माता मंगला गौरी के साथ भगवान शिव की भी पूजा करती हैं।
संतान सुख प्राप्ति के लिए भी ये व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से मां पार्वती खुश होती है और आपको सदा सौभाग्यवती रहने का आशीष देती है। जिस तरह से सावन के सभी सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते है, ठीक उसी तरह सावन माह के हर मंगलवार का दिन मां मंगला गौरी की पूजा के लिए समर्पित होता है। आज के मां मंगला गौरी व्रत पर एक खास संयोग भी बन रहा है।
सावन के शुभ संयोग में मंगला गौरी व्रत/मुहूर्त
सावन के चौथे मंगलवार पर आज सिध्द और साध्य योग बन रहा है। सिध्द योग का समय दोपहर 3 बजकर 1 मिनट तक रहेगा इसके बाद साध्य योग शुरु हो जाएगा। जबकि सुबह 5 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 9 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। इस शुभ संयोग में मां मंगला गौरी की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सुथरे कपडे़ पहन लें इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें फिर मंदिर की साफ सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी पार्वती , भोले शंकर और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद देवी को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें।
मां पार्वती को सिंदूर का तिलक लगांए और उनके सामने घी का दीया जलाएं। अब लाल चूड़ियां, लाल बिंदी, लाल चुनरी, मेंहदी आदि सुहाग का सामान अर्पित करें और फिर व्रत की कथा सुनें। पूजा के दौरान मां मंगला गौरी से सौभाग्य प्राप्ति की प्रार्थना करें।
मां मंगला गौरी पूजा के मंत्र
- सर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरणनेताम्बिके गौरी नाराय़णी नमोस्तुते ।।
- ह्मीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।।

