अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत के पूर्व हॉकी टीम के कप्तान संदीप सिंह भारतीय हॉकी के एक दिग्गज खिलाड़ी हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता, दो बार के ओलंपियन और दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर में से एक संदीप सिंह है। उन्होंने मौत को चकमा देकर अपने आपको सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाया है।
बचपन में आलसी होने के बाद भी बने हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी
संदीप सिंह बचपन में बहुत आलसी थे। उनका बचपन खाने और सोने में ही बीता है। संदीप सिंह की हरकतों से उनके घर वालों को अंदाजा हो गया कि संदीप खेल में आगे नहीं जा सकते।
संदीप सिंह के बडे भाई ने बचपन से ही हॉकी को अपना करियर चुन लिया था और इस करियर में उनको लगातार पॉपुलैरिटी मिल रही थी। अपने भाई की इतनी पॉपुलैरिटी को देखकर संदीप सिंह ने भी हॉकी खेलने का मन बना लिया था।
संदीप सिंह के संघर्ष का दौर
22 अगस्त 2006 का दिन भारतीय टीम के साथ-साथ एक महान हॉकी प्लेयर संदीप सिंह के लिए काला दिन था। इस दिन संदीप सिंह अपने दोस्त मेजर सिंह के साथ शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे।
संदीप जर्मनी मे होने वाले वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए नेशनल टीम के साथ जुडने वाले थे। संदीप सिंह के दोस्त द्वारा एक गोली सीधे उनकी जांघ पर लग गई। जिसकी वजह से वह बहुत बुरे तरीके से घायल हो गया।
गोली ने उनके बैकबोन, लीवर, और किडनी को पुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस खबर ने हॉकी देखने वाले पूरे देश के दर्शकों में खलबली मचा दी। टूर्नामेंट उस घटना के ठीक 2 दिन बाद होने वाला था।
संदीप इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बन पाए। गोली ने उनके बैकबोन, लीवर और किडनी को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना से उनके शरीर का निचला हिस्सा पैरालाइज हो गया।
गिरने के बाद संदीप सिंह ने की शानदार वापसी
डॉक्टरों ने कह दिया कि संदीप अब और नहीं खेल सकते। सभी को लगने लगा था कि उनका हॉकी करियर खत्म हो गया है।
हॉकी एक ऐसा खेल है जिसमें फिटनेस बहुत जरूरी है। संदीप सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और अपने आप को फिर से हॉकी के लायक बनाया।
भारतीय हॉकी टीम में कप्तान के रुप में की वापसी

संदीप सिंह 2008 में भारतीय हॉकी टीम में फिर से खेलने के लिए आगे आए। संदीप ने 2008 में 8 गोल कर हीरो बनकर सबको चौंका दिया। भारत को दूसरा स्थान दिलाने में मदद करने के साथ-साथ उन्हें ‘टॉप गोल स्कोरर’ पुरस्कार भी मिला।
उन्हें 2009 में भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया। संदीप सिंह की कड़ी मेहनत को देखते हुए सन् 2010 में उनको अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। जिसके बाद उन्होंने 13 साल में पहली बार सुल्तान अजलान शाह कप जीतने वाली टीम का नेतृत्व किया।
उन्होंने भारत को 2012 के समर ओलंपिक में क्वालीफाई करने में मदद की जो लंदन में आयोजित किया गया था। संदीप सिंह ने इस मैच में 5 गोल दागे, जिसमें उनकी हैट्रिक भी शामिल है।
साल 2014 में संदीप सिंह इंडियन नेशनल हॉकी टीम से बाहर हो गए। बाद में संदीप सिंह ने क्लब हॉकी लीग और विदेश मे अपनी ताकत दिखानी शुरु कर दी। सन् 2017 की शुरुआत मे उन्होंने हॉकी से सन्यास ले लिया था। वर्तमान मे संदीप सिंह हरियाणा सरकार में खेल मंत्री के पद पर कार्यरत हैं।

